बिहार में सत्ता परिवर्तन करने का दावा कर सियासत में उतरे प्रशांत किशोर की राजनीतिक पारी बुरी तरह से फ्लॉप रही। उन्होंने बिहार की 238 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे लेकिन ज्यादातर उम्मीदवार जमानत जब्त करा बैठे। पार्टी को एक भी सीट नहीं मीली। चुनाव में हार के बाद जन सुराज पार्टी ने अपने प्रोफेशनल विंग में बड़ी छंटनी की है। पार्टी ने अफने प्रोफेशनल टीम, जेएसपीटी कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड में काम करने वाले 1000 लोगों को नौकरी से बाहर निकाल दिया है।
प्रशांत किशोर की कंपनी ने इन्हें नवंबर और दिसंबर 2025 के बीच में निकाला है। बिहार में प्रशांत किोर की पार्टी 3.34 प्रतिशत वोट हासिल कर पाई। कुल 16.77 लाख वोट मिले लेकिन सफलता नहीं मिली। कई सीटें ऐसी रहीं, जहां जन सुराज के उम्मीदवार को नोटा से भी कम सीटें आईं। प्रशांत किशोर ने कहा है कि वह बिहार की राजनीति नहीं छोड़ेंगे लेकिन अब उन्हीं की पार्टी से 1 हजार लोग निकाले गए हैं।
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छंटनी क्यों हुई है?
जन सुराज पार्टी पार्टी के मीडिया इन-चार्ज ओबैदुर रहमान ने कहा कि ये लोग सिर्फ चुनाव के लिए 5-6 महीने पहले हायर किए गए थे। उनका काम सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी उम्मीदवारों की मदद करना था। चुनाव खत्म होने के बाद इनकी जरूरत नहीं रही, इसलिए उनकी छंटनी कर दी गई। जन सुराज पार्टी का कहना है कि यह राजनीतिक पार्टी से अलग कंसल्टेंसी फर्म था और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं।
निकाले गए कर्मचारी क्या कह रहे हैं?
निकाले गए कुछ कर्मचारियों ने शिकायत की है कि उन्हें पहले से साफ नहीं बताया गया था कि नौकरी सिर्फ चुनाव तक की है। कई लोग अच्छी कंपनियों की जॉब छोड़कर आए थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और खुद से इस्तीफा देने के लिए उन पर दबाव बनाया गया।
कंसल्टेंसी फर्म में काम करने वाले कर्मचारियों ने कहा है कि कुछ लोगों को दिसंबर 2025 का वेतन भी नहीं मिला है। द हिंदू की एक रिपोर्ट में एक पूर्व कर्मचारी के हवाले से बताया गया है कि वह बिहार बदलने के सपने के साथ आया था लेकिन अब सीवी खराब हो गई है। ठगा गया लोग महसूस कर रहे हैं।
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प्रशांत किशोर ने चुप्पी साधी है
प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। पार्टी पहले ही कार्यकारिणी भंग कर चुकी है। नए सिरे से पार्टी के संगठन की रूपरेखा तैयार किया जाएगा। अब प्रशांत किशोर की चौतरफा आलोचना हो रही है।
