भारत में कामकाज कर रहे लोगों को लेकर एक रिसर्च सामने आई है, जिसमें चिंताजनक नतीजे सामने आए हैं। एस सर्वे के अनुसार, देशभर में 86 प्रतिशत कर्मचारी खुद को पीड़ित और वर्कप्लेस पर संघर्षरत मानते हैं। 86 प्रतिशत लोगों का मानना है कि उनके काम में बड़े बदलाव हो रहे हैं और यह दुनिया से कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट के असार, 89 प्रतिशत कर्मचारी नई स्किल सीखने में लगे हुए हैं, ताकि बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकें। 

 

लगातार बदल रहे कामकाज के तरीकों के बीच नई स्किल्स सीखने का दबाव कर्मचारी भी महसूस कर रहे हैं। कर्मचारी खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने एजुकेश टेस्टिंग सर्विस की ह्यूमैन प्रोग्रेस रिपोर्ट के आधार पर बताया है कि भारत में वर्कप्लेस पर बड़े स्तर पर बदलाव हो रहे हैं।  इन बदलावों के कारण कर्मचारी परेशान भी हैं और खुद को ढालने की कोशिश भी कर रहे हैं। 

 

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AI का दिख रहा असर

इस रिपोर्ट के अुसार, अब नौकरी सिर्फ काम करने से नहीं बची रहेगी बल्कि जरूरत के हिसाब से नई स्किल्स को सीखने से बचेगी। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) काम करने के तरीके और भूमिकाओं को तेजी से बदल रहा है वैसी ही भारतीय कर्मचारी नई स्किल्स सीखने पर ध्यान दे रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 89 प्रतिशत लोग नई स्किल्स को सीखने के लिए तैयार हैं या कोशिश कर रहे हैं। 

वैश्विक स्तर पर क्या स्थिति?

वैश्विक स्तर पर भारत से कम कर्मचारियों ने वर्कप्लेस पर बदलाव का सामना करने की बात कही है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 67 प्रतिशत कर्मचारी वर्कप्लेस पर कम से कम एक बड़े बदलाव का सामना कर रहे हैं। हालांकि, भारत उन देशों की लिस्ट में शामलि है जो सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां लगभर 98 प्रतिशत कर्मचारियों ने अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए कम से कम एक बाधा का सामना करने की बात कही है। इससे साफ है कि भारत में कर्मचारियों पर लगातार नई स्किल सीखने का दबाव बना हुआ है।

10 में से 9 लोग सीख रहे नई स्किल

रिपोर्ट में बताया गया है कि भले ही भारत में लोगों पर नई स्किल सीखने का दबाव हो लेकिन इसे बावजूद भारत ने मजबूती भी दिखाई है। भारत का ड्यूमैन प्रोग्रेस इंडेक्स स्कोर 114.4 रहा, जो कि वैश्विक औसत (96.7) से काफी ज्यादा है। इस रिपोर्ट में पता चलता है कि भारत के कर्मचारी खुद को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 10 में से 9 लोग कह रहे हैं कि वे नई स्किल सीख रहे हैं, जबकि 90 प्रतिशत लोगों का मानना है कि बदलती जरूरतों के समय में सर्टिफिकेट बहुत जरूरी हो गए हैं। 

AI की वजह से बदलाव

ETS के CEO अमित सेवक ने कहा, 'बदलती दुनिया में कर्मचारी तेजी से खुद को ढाल रहे हैं। नई स्किल्स सीखना और बदलावों को अपनाना भी अब एक जरूरी स्किल बनती जा रही है।' उन्होंने इस बदलाव के पीछे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को माना है। भारत के कर्मचारी मानते हैं कि उनके 42 प्रतिशत से ज्यादा काम AI टूल्स से जुड़े हुए हैं और यह वैश्विक औसत से ज्यादा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 78 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वे AI का इस्तेमाल मजबूरी में कर रहे हैं, क्योंकि नौकरी बचाने के लिए यह जरूरी हो गया है। वैश्विक स्तर पर, रिपोर्ट में स्किल गैप बढ़ने की बात कही गई है।

 

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AI बना मानसिक चिंता का कारण 

AI स्किल की जरूरत और असली जानकारी के बीच 19 प्वाइंट का अंतर है और करीब 88 प्रतिशत कर्मचारी चाहते हैं कि कंपनियां उन्हें नई स्किल्स सीखने में मदद करें। हालांकि, ज्यादातर कर्मचारियों को कंपनियों की ओर से यह मदद नहीं मिल पाती। इस कारण लोगों की मानसिक स्थिति पर असर पड़ रहा है और उ्नहें चिंता हो रही है। एक और समस्या यह है कि हर किसी को स्किल सर्टिफिकेट नहीं मिल रहे हैं। दुनिया में 73 प्रतिशत लोग सर्टिफिकेट चाहते हैं लेकिन सिर्फ 45 प्रतिशत लोगों को ही यह मिल पाता है, जिससे खर्च की दिक्कत सामने आती है।