होली रंगों और खुशियों का त्योहार है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इस त्योहार के आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। होली पर घर में विभिन्न प्रकार की मिठाइयां बनती हैं। खासतौर से इस त्योहार पर घर में गुझिया, मालपुआ, ठंडाई और लड्डू बनाया जाता है। हर शहर की होली का रंग कुछ अलग होता है। उसी तरह दिल्ली में होली सिर्फ एक त्योहार नहीं है।
यह दिन लोगों के लिए एक उत्सव की तरह होता है। यह त्योहार सिर्फ रंगों का नहीं बल्कि प्रेम, सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने पुराने गिले-शिकवे को भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं।
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कैसे मनाते हैं होली ?
लोग सुबह उठते ही लाउडस्पीकर पर बॉलीवुड के क्लासिक और होली से जुड़े गाने बजने लगते हैं। इन गानों को सुनते ही दिमाग में होली का खुमार चढ़ने लगता है। लोग छतों और लॉन में इकट्ठा हो जाते हैं। इस त्योहार में लोग छतों से एक-दूसरे पर पानी फेंकते हैं। कोई पहले रंग फेंकता है और कुछ ही मिनटों में हर कोई गुलाबी, पीले और नीले रंगों में रंग जाता है। ये तो आम बातें हैं जो हम सभी होली के बारे में जानते हैं। क्या आप जानते हैं बिहार के मैथिल परिवार में होली कैसे मनाते हैं?
माता-पिता के पैर पर अबीर लगाते हैं
मेरे परिवार में होली की सुबह उठकर हम अपने माता-पिता के पैर पर अबीर लगाते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं। इसके बाद घर में पूड़ी पकवान बनना शुरू हो जाते हैं। घर में मीठे में मालपुआ, खीर और गुझिया बनती है। इस दिन हमारे यहां मटन और कटहल की सब्जी जरूर बनती है। इतना ही नहीं आस-पास के लोग एक-दूसरे को घर पर खाने के लिए न्योता भी भेजते हैं। हालांकि अब यह चीज धीरे-धीरे कम होती जा रही है। भाभी-देवर और जीजा- साली में खूब हंसी-ठिठोली चलती है।
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इसके बाद घर के सभी लोग एक-दूसरे पर रंग और गुलाल लगाते हैं। घर पर ठंडाई भी बनती हैं। परिवार के सभी लोग इस त्योहार के आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
