पश्चिम बंगाल के चुनाव में साल 2021 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने खूब पसीना बहाया था। इसका उसे फायदा भी हुआ लेकिन यह फायदा इतना नहीं था कि वह ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर कर पाए। उस चुनाव में बीजेपी ने अपनी मजबूत जगह बनाई और पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी बनकर उभरी। ममता बनर्जी को उनकी ही सीट से हराकर बीजेपी ने नैतिक जीत हासिल की लेकिन सत्ता तृणमूल कांग्रेस के पास ही रही। पिछले चुनाव में बीजेपी ने काफी पहले से मेहनत की थी और ऐसा लगा कि आखिरी वक्त में उसका खेल खराब हो गया। शायद यही वजह है कि इस बार बीजेपी ने आखिर में ज्यादा मेहनत करने का प्लान बनाया और अब चुनाव से लगभग एक-डेढ़ महीने पहले राज्य में यात्राएं शुरू कर दी हैं।

 

बिहार के चुनाव जब हो रहे थे तब तक बीजेपी का काडर पश्चिम बंगाल में एकदम सुस्त नजर आ रहा था। सिर्फ सुवेंदु अधिकारी ऐसे थे जो लगातार नेता विपक्ष के रूप में विधानसभा से लेकर सड़क तक आवाज उठा रहे थे। 2025 जब खत्म हो रहा था तब अचानक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल पहुंचे और पुराने नेताओं से मुलाकात की और उन्हें ऐक्टिवेट कर दिया।

आखिरी वक्त में होगी धुआंधार बैटिंग?

 

अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी आखिर में प्रचार अभियान शुरू कर रही है ताकि वोटिंग के समय तक माहौल बना रहे। बीजेपी से काफी पहले ममता बनर्जी चुनाव में उतर चुकी हैं और अभिषेक बनर्जी पूरे राज्य की यात्रा कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी ने अब जो परिवर्तन यात्राएं शुरू की हैं वे 15 मार्च को खत्म होंगी और तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी के पक्ष में कोलकाता में एक बड़ी रैली करेंगे। उम्मीद है कि यह रैली उस वक्त होगी जब पश्चिम बंगाल में कम से कम पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन भरे जा रहे होंगे। इसके जरिए बीजेपी की कोशिश है कि माहौल बना रहे और इसका फायदा उसके पक्ष में होने वाली वोटिंग में भी दिखे।

 

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इन रैलियों के जरिए बीजेपी सभी 294 विधानसभा सीटों में पहुंचना चाहती है और हर विधानसभा के लोगों को पीएम मोदी की रैली में भी पहुंचाया जाए। इन रैलियों में बीजेपी मुखरता से अवैध घुसपैठिए, रोजगार, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को उठाने के लिए अपने शीर्ष नेताओं के साथ स्थानीय नेताओं को भी उतार रही है। बीजेपी चाहती है कि पिछली बार की तरह ममता बनर्जी उसे बाहरी बताकर खारिज न कर सकें। यही वजह है कि बीजेपी अपने स्थानीय चेहरों को ज्यादा तरजीह दे रही है। 

 

नितिन नवीन और गृहमंत्री अमित शाह की रैली वाले मंचों पर भी पश्चिम बंगाल बीजेपी के नेताओं को ही प्राथमिकता दी गई। इसी तरह शिवराज सिंह चौहान के साथ शांतनु ठाकुर, लॉकेट चटर्जी और सुवेंदु अधिकारी मौजूद थे। अमित शाह की रैली में उनके मंच पर सुकांता मजूमदार, नितिन नवीन की रैली में दिलीप घोष, राजनाथ सिंह की रैली में सामिक भट्टाचार्य और देवेंद्र फडणवीस की रैली में मिथुन चक्रवर्ती मौजूद थे।

 

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लंबे चुनाव में हुआ था नुकसान

 

पिछली बार पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव कुल 8 चरण में हुए थे। 27 मार्च, 1 अप्रैल, 6 अप्रैल, 10 अप्रैल, 17 अप्रैल, 22 अप्रैल, 26 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले गए थे और 2 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। पिछली बार 2 मार्च को पहले चरण की अधिसूचना जारी हो गई थी और पर्चा भरने की आखिरी तारीफ 9 मार्च थी। 5 मई को ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी। इस हिसाब से इस बार के चुनाव थोड़ी देरी से होंगी। ऐसे में यह भी हो सकता है कि चुनाव कम चरण में हों।

 

पिछली बार आखिरी के तीन चरण के चुनाव कोरोना से प्रभावित हुए थे और लंबे समय तक चुनाव के चलते बीजेपी का काडर पस्त हो गया था। ममता बनर्जी ने अपने काडर को आखिर तक ऐक्टिवेट रखा था और इसका उन्हें फायदा भी मिला था। इस बार कयास लगाए जा रहे हैं कि चुनाव लेट शुरू होंगे तो कम चरण में निपटाया जा सकता है।