तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए एक तरफ DMK और कांग्रेस गठबंधन है तो दूसरी तरफ AIADMK और बीजेपी का गठबंधन है। दोनों गठबंधन आगामी विधानसभा चुनाव में एक दूसरे के आमने-सामने सत्ता पाने के लिए सियासी जंग लड़ रहे हैं। दोनों ही तरफ से सीट बंटवारे को लेकर चुनौती बनी हुई है क्योंकि DMK गठबंधन में 21 पार्टियां शामिल हैं, जबकि AIADMK गठबंधन में भी करीब एक दर्जन दल शामिल होकर चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य के दोनों धड़े जमीन पर जनता के बीच मजबूती बनाने के लिए अपनी कमर कस चुके हैं।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सत्ता में आने के लिए सभी संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं, वह समय को देखते हुए अपनी योजनाओं को जमीन पर उतार रहे हैं। इसमें सबसे अहम कड़ी टिकट बंटवारा है। ऐसे में जहां राज्य के चुनावों के लिए DMK-कांग्रेस के बीच गठबंधन की औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्यमंत्री स्टालिन के बीच फोन पर बात कर सीट शेयरिंग को फाइनल रूप दे दिया गया है। हालांकि, बीजेपी प्लस गठबंधन में भी टिकट बंटवारे को लेकर आखिरी तौर की बात चल रही है।
आइए जानते हैं कि तमिलनाडु में DMK-कांग्रेस की सीटें जब फाइनल हो गई हैं तो इस बीच AIADMK और बीजेपी में सीट बंटवारे को लेकर क्या हो रहा है...
डीएमके और कांग्रेस के बीच बातचीत
होली के मौके पर मल्लिकार्जुन खरगे और एमके स्टालिन के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इसकी जानकारी सामने आई। इस दौरान दोनों के बीच सीट शेयरिंग पर बात बन गई। राज्य में सीट बंटवारे को लेकर पहले से बातचीत चल रही थी। डीएमके ने कांग्रेस को 28 विधानसभा सीटों के साथ में एक राज्यसभा सीट देने का वादा किया है। तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं। इसमें से डीएमके ने 25 विधानसभा सीटों के साथ एक राज्यसभा सीट कांग्रेस को दी। दरअसल, कांग्रेस राज्य में पहले 30 सीटें डीएमके से मांग रही थी, लेकिन सत्तारूढ़ दल ने मना कर दिया। इसके बाद कई दौर की बातचीत के बाद कांग्रेस 30 सीटों पर लड़ने पर अड़ गई।
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इसके बाद डीएमके ने कांग्रेस को 25 सीटें और एक राज्यसभा सीट का अंतिम ऑफर दिया, जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। आखिर में ऐसे लगने लगा कि जैसे कांग्रेस-डीएमके के बीच का गठबंधन टूट जाएगा। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान ने डीएमके के साथ सीट शेयरिंग का फार्मूला सुलझाने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को जिम्मा सौपा था। उन्होंने डीएमके के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक करके समन्वय किया। अंत में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने खुद स्टालिन से बात करके बीच का रास्ता निकाला और सीट शेयरिंग को फाइनल कर दिया।
इस बार भी कांग्रेस को 25 सीटें
दरअसल, पिछले चुनाव में भी डीएमके ने कांग्रेस को 25 सीटें दी थीं। कांग्रेस के 25 में से 18 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। पिछले बार के प्रदर्शन को देखते हुए इस बार 35 विधानसभा सीट के साथ 2 राज्यसभा सीट की मांग की थी। ऐसे में डीएमके ने कांग्रेस साफ-साफ बता दिया था कि 25 विधानसभा और एक राज्यसभा सीट से ज्यादा नहीं दे सकती।
बता दें कि स्टालिन के नेतृत्व में उनकी पार्टी डीएमके ने एक विशाल गठबंधन तैयार किया है। गठबंधन का नाम धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (Secular Progressive Alliance) है, जिसमें कुल 21 पार्टियां शामिल हैं। इसमें कांग्रेस भी सहयोगी है। इन्हीं सहयोगियों को डीएमके राज्य की 234 विधानसभा सीटों में से हिस्सेदारी दे रही है। इसमें से कई पार्टियों को सीएम स्टालिन ने लड़ने के लिए सीटें दी हैं और कई दलों को गठबंधन में रखकर राज्य के हर कोने में जनाधार बढ़ाएगी। इस गठबंधन में तय हुआ है कि जिसे चुनाव में सीटें नहीं मिली हैं, उन्हें बाद में सरकार बनने पर आयोगों में हिस्सेदारी दी जाएगी।
एनडीए में सीट फाइनल करने का दबाव
डीएमके और कांग्रेस के सीट बंटवारे के बाद AIADMK और बीजेपी गठबंधन यानी कि NDA में भी सीट बंटवारे को लेकर स्थिती साफ करने का दबाव बढ़ गया है।
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दरअसल, AIADMK-बीजेपी ने एक साल पहले ही अपने गठबंधन का ऐलान कर दिया था, लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए सीट-शेयरिंग की औपचारिक बातचीत को लेकर दोनों पार्टियों के बीच अभी भी गतिरोध बना हुआ है। AIADMK और बीजेपी के बीच इस बात पर खींचतान हैं कि एनडीए में सीट-शेयरिंग की बातचीत का नेतृत्व कौन करेगा? इसी गठबंधन में एनडीए में शामिल पट्टाली मक्कल काची (PMK), अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) और तमिल मनीला कांग्रेस (TMC) जैसे छोटे सहयोगियों के साथ बातचीत को लेकर भी सीट शेयरिंग पर बात नहीं बन पा रही है।
सीट शेयरिंग की बातचीत एक चुनौती
राज्य की कुछ खास विधानसभा सीटों को लेकर सीट शेयरिंग की बातचीत एक चुनौती बनी हुई है। इस वजह से बीजेपी के लिए सीटों की संख्या पर फैसला लेने में देरी हो रही है। पहले, AIADMK और बीजेपी अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिझागा वेत्री कझगम को एनडीए में शामिल करने के लिए उत्सुक दिख रहे थे। हालांकि, विजय के ठंडी प्रतिक्रिया के बाद वह एनडीए में शामिल नहीं हो पाए।
बीजेपी ने तमिलनाडु के लिए चुनाव इंचार्ज पार्टी नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को बनाया है। गोयल लगातार AIADMK अध्यक्ष एडापड्डी पलानीसामी के साथ सीट शेयरिंग को लेकर बात कर रहे थे। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलानीसामी भी से मुलाकात की थी, लेकिन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।
एनडीए में बातचीत कहां अटकी है?
फिलहाल तमिलनाडु एनडीए में सीट शेयरिंग की बातचीत रुकी हुई है क्योंकि बीजेपी पहले चुनावों के मुकाबले में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है। बीजेपी तमिलनाडु में अपनी सीमित मौजूदगी से आगे बढ़कर अपनी पकड़ बनाना चाहनी है, लेकिन AIADMK अपना द्रविड़ बेस नहीं छोड़ना चाहती। पलानीसामी की पार्टी 234 विधानसभा सीटों में से 170 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है।
हालांकि, बीजेपी 35 से ज्यादा सीटें मांग रही है। पिछले 2021 के चुनावों में AIADMK ने बीजेपी को 20 सीटें दी थीं, जिसमें से उसे मात्र 4 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई, मगर राज्य में उसका वोट शेयर 11% रहा। बीजेपी इसी वोट शेयर को लेकर 35 सीटें मांग रही है। 2024 के लोकसभा चुनावों में AIADMK को भी एक भी सीट नहीं मिली, लेकिन उसका वोट शेयर 21% रहा था। ऐसे में आगामी चुनावों के लिए AIADMK, बीजेपी को 25 से अधिक सीटें नहीं देना चाहती। इसी तरह से TTV दिनाकरन की AMMK को 6-10 सीटें और PMK को लगभग 20-23 सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
