उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल के सबसे चर्चित जिलों में से एक जिला है भदोही। यहां के 'मिश्रा' परिवार की तूती पूरे मंडल में बोलती थी। करीब 2 दशक तक, विजय मिश्रा के परिवार का यहां बहुत प्रभावी रहा है। विजय मिश्रा, ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर ऐसी पकड़ रखते थे कि उन्हें डिगाना मुश्किल था। सरकारें बदलीं, पार्टियां आईं-गईं और जातीय समीकरण बदलते रहे, लेकिन विजय मिश्रा के परिवार का दबदबा कायम रहा।
विजय मिश्रा भदोही की राजनीति के धुरी थी। दबदबा ऐसा था कि चाहे रियल एस्टेट का कारोबार हो या प्रशासन पर धाक हो, किसी की हिम्मत नहीं थी कि कोई प्रोजेक्ट, मिश्रा परिवार की मंजूरी के बिना आगे बढ़ पाए। अब पूर्वांचल का यह किला, ढह रहा है। विजय मिश्रा के अच्छे दिन खत्म हो गए हैं। शुक्रवार को इस परिवार को एक और झटका लगा।
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कभी दबदबा था, अब जेल में बंद है पूरा परिवार
भदोही की विशेष MP/MLA अदालत ने 6 साल पुराने भूमि घोटाले और फ्रॉड के मामले में विजय मिश्रा, उनकी पत्नी और पूर्व विधान परिषद सदस्य रामलली मिश्रा और बेटे विष्णु मिश्रा को 10-10 साल की सजा सुनाई है। बहू रूपा मिश्रा को 4 साल की जेल हुई। अदालत ने हर व्यक्ति पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। शिकायत विजय मिश्रा के रिश्तेदार कृष्ण मोहन तिवारी ने की थी, जिसमें 50 बीघा जमीन, मकान और करीब 1500 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप था। अब मिश्रा परिवार के सभी मुख्य सदस्य जेल में हैं।
विजय मिश्रा कैसे बने बाहुबली?
पूर्व विधायक विजय मिश्रा प्रयागराज से आते हैं। हंडिया तहसील के पास एक गांव है खपटिया। इनका पैतृक गांव यही है। वह पहले पेट्रोल पंप और प्रॉपर्टी का कारोबार करते थे। वह पूर्व ख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के नजदीकी थे। उनके कहने पर ही वह राजनीति में आए। उन्होंने ब्लॉक की राजनीति शुरू कर और समाजवादी पार्टी के सिंबल से ब्लाक प्रमुख बने। साल 2022 में मुलायम सिंह यादव ने पहली बार उनको ज्ञानपुर विधानसभा से टिकट दिया। विजय मिश्रा चुनाव जीत गए।
साल 2005 में विजय मिश्रा पत्नी रामलली को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में भी कामयाब हो गए। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी से 2007 और 2012 में विधानसभा का चुनाव जीते। बाहुबली की छवि होने की वजह से साल 2017 में अखिलेश यादव ने उनका टिकट काट दिया था। विजय मिश्रा ने निषाद पार्टी से चुनाव लड़ा और मोदी लहर के बाद भी चुनाव जीत गए। क्षेत्र में दमदार पकड़ होने के कारण वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बयानबाजी करने लगे। इसी के बाद से सरकार ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों में घेराबंदी करनी शुरू की और बाहुबली विजय मिश्रा सलाखों के पीछे पहुंच गए। परिवार के लोगों पर संकट के बादल छाते चले गए।
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संपत्ति हड़पने के मुकदमे में, पत्नी, बहु बेटा, सब पहुंच गए जेल
भदोही जनपद में एक कोतवाली है गोपीगंज। यहीं एक कवलापुर गांव है। यहीं विजय मिश्रा के एक रिश्तेदार मोहन तिवारी रहते हैं। मोहन ने अगस्त 2020 में विजय मिश्रा, पत्नी रामलली, पुत्र विष्णु मिश्र और बहू रूपा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने चारों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। एमपीएमएल कोर्ट ने गवाह और साक्ष्य के आधार पर विजय मिश्रा, पत्नी रामलली, पुत्र विष्णु को 10 साल की सजा सुनाई। बहू रूपा के इस मामले में 4 साल की साधारण कारावास की सजा सुनाई।
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विजय मिश्रा के पुराने 'पाप' कौन से हैं?
विजय मिश्रा ने 21 वर्ष की उम्र में प्रयागराज कचहरी में 11 फरवरी 1980 को जमानत के सिलसिले में पैरवी करने आए प्रकाश नारायण पांडेय की साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। इसके बाद वह राजनीति में आ गए। यहीं से वह बाहुबली बने। प्रयाराज की एमपीएमएलए कोर्ट ने विजय मिश्रा, उनके साथी जीत नारायण, संतराम और बलराम को दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई।
रसूख ऐसा कि कोठी के सामने सिर झुकाकर निकलते थे लोग
बाहुबली विजय मिश्रा को खुद को जनबली कहते थे। लेकिन हकीकत में उनका रसूख ऐसा था कि कोठी के सामने से गुजरने वाले लोग सिर झुकाकर निकलते थे। आस पास के जनपदों के नामी गिरामी लोग भी अपनी पंचायत निपटाने के लिए विजय मिश्रा का सहारा लेते थे। विजय मिश्रा ने 20 वर्ष में अकूत संपत्ति जुटा ली थी। हर चुनाव में दिए हलफनामे में पता चलता रहा कि 2 दशक में विजय मिश्रा की संपत्ति कैसे करोड़ों में बदल गई। अब परिवार का दबदबा ऐसे खत्म हुआ है कि लोग, जमानत के लिए गुहार लगा।
