तृणमूल कांग्रेस और पूर्व सीएम ममता बनर्जी की मुश्कीलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट को एक और झटका उस समय लगा, जब TMC की बंगाल प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ममता बनर्जी की पिछली सरकार में चंद्रिमा भट्टाचार्य वित्त और स्वास्थ्य जैसे अहम विभागों में मंत्री रही हैं। ममता ने उन्हें पार्टी और सरकार में बड़े पदों से नवाजा था।

 

टीएमसी की विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी ने चंद्रिमा भट्टाचार्य को संगठन की अहम जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन चंद्रिमा ने टीएमसी बंगाल की अध्यक्ष बनने के मात्र महीने बाद ही पद से इस्तीफा दे दिया। 

 

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चंद्रिमा ने ममता बनर्जी को लिखा पत्र

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी को लिखे एक पत्र में पार्टी में अपने सभी अन्य पदों से इस्तीफा देने की बात कही है। इस इस्तीफे के बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि चंद्रिमा आने वाले समय में टीएमसी या फिर बीजेपी में शामिल हो सकती हैं।

ममता बनर्जी ने संभाली कमान

चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद टीएमसी सुप्रीमों ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा,  'तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के तौर पर, मैं घोषणा करती हूं कि आज से मैं पश्चिम बंगाल राज्य TMC अध्यक्ष की भूमिका भी संभालूंगी। साथ ही दो और लोगों मदन मित्रा और कुणाल घोष को पार्टी कमेटी में शामिल किया गया है। दोनों को इस कमेटी का महासचिव बनाया गया है।'

 

 

 


वहीं, इस घटनाक्रम के बाद टीएमसी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी कोलकाता में ममता बनर्जी के घर पहुंचे।

 

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पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा

चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, 'कौन इस्तीफा देता है, यह पूरी तरह से उन पर निर्भर करता है। इससे हम पर क्या असर पड़ेगा? हमारी पार्टी इससे कमजोर नहीं होगी। पार्टी मजबूत रहेगी। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता ममता बनर्जी की वजह से पार्टी के साथ हैं। हम 41 फीसदी पर हैं, जबकि बीजेपी 4 फीसदी आगे है, इसलिए कौन किसे छोड़ता है, यह सवाल बेमतलब है। पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा।'

 

 

 

टूट गई है पूरी पार्टी- बीजेपी

चंद्रिमा भट्टाचार्य के टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी विधायक राजेश कुमार सुरोलिया ने कहा कि यह टीएमसी की अंदरूनी गुटबाजी और लड़ाई-झगड़ा है। उन्होंने कहा, 'यह पार्टी हर तरह के गैर-कानूनी कामों में लगी हुई थी, जिसमें छीना-झपटी, जबरन वसूली, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और कमीशन लेना शामिल है। अब जब उन्हें इससे कुछ नहीं मिल रहा है, तो वे आपस में लड़ रहे हैं। आपसी अविश्वास है और कोई किसी पर भरोसा नहीं करता।'

 

 

 

 

बीजेपी ने आगे कहा, 'हम सालों से कह रहे थे कि यह पार्टी नहीं चलेगी क्योंकि एक बार उन लोगों को हटा दिया गया, तो कोई राजनीतिक आधार नहीं बचा। 4 मई को नतीजे आए 60 दिन हो गए हैं। आप सिर्फ 60 दिनों के बाद स्थिति देख सकते हैं। पार्टी अंदरूनी लड़ाई के बीच पूरी तरह से टूट गई है।'