शुक्रवार (27 फरवरी) को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा चुनावों के लिए चार प्रत्याशियों के नाम घोषित किए। इस नामों में बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार, मेनका गोस्वामी और अभिनेत्री कोयल मलिक शामिल हैं। यह चारों नाम ऐसे हैं, जो पहली बार भारत की संसद के उच्च सदन राज्यसभा जाएंगे। बंगाल में टीएमसी के विधायकों की संख्या को देखते हुए इन चारों का राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है। ऐसे में टीएमसी राज्यसभा सीटों पर अपनी पकड़ भी मजबूत करने जा रही है।
बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार, मेनका गोस्वामी और अभिनेत्री कोयल मलिक ऐसे नाम हैं, जो अपने क्षेत्र के महारथी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मुख्यमंत्री ममता ने अपनी पार्टी के हार्डकोर नेताओं की जगह इन्हें ही क्यों चुना? क्या ये केवल राज्यसभा सदस्य बनकर पार्टी के लिए वोट बढ़ाने का साधन हैं, या इसके पीछे ममता दीदी की कोई गहरी रणनीति छुपी हुई है... आइए जानते हैं
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के पास वर्तमान में राज्यसभा में 13 सांसद हैं। इन चार नई सीटों के मिलने से राज्यसभा में पार्टी की संख्या बढ़कर 17 हो जाएगी। इससे संसद में टीएमसी की राजनीतिक ताकत और अधिक बढ़ेगी। यह इसलिए क्योंकि राजनीति में राज्यसभा की सीटें काफी मायने रखती हैं। राज्यसभा सांसद का कार्यकाल छह साल के लिए होता है और यह केंद्र में अधिक प्रभाव जमाने का जरिया बनते हैं।
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ममता बनर्जी ने इन्हीं नामों को क्यों चुना?
सीएम ममता बनर्जी ने चुनावी रणनीति के तहत सभी नामों को अलग-अलग क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है। इसमें बाबुल सुप्रियो बंगाल में लोकप्रिय गायक हैं। वह पूर्व बीजेपी नेता और नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। मगर, 2021 में उन्होंने बीजेपी से इस्तीफा देकर टीएमसी ज्वाइन कर ली थी। इसलिए बाबुल को राज्यसभा भेजकर ममता न केवल विधानसभा सीटें मजबूत की हैं, बल्कि बीजेपी के कुछ कट्टर समर्थकों को भी अपनी पार्टी में लाने की कोशिश कर रही हैं।

इसी तरह से राजीव कुमार पश्चिम बंगाल के डीजीपी और कोलकाता के कमिश्नर रह चुके हैं। वह कानून व्यवस्था और प्रशासन के जानकार हैं। मेनका गोस्वामी के जरिए LGBTQ समुदाय के साथ में खुले विचार वाले युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश है। साथ ही कोयल मलिक जैसे युवा और लोकप्रिय चेहरे से पार्टी को नयी ऊर्जा और पहचान मिलेगी।
बाबुल सुप्रियो हिंदुओं के लिए आकर्षण?
इस लिस्ट में सबसे सबसे चर्चित नाम है बाबुल सुप्रियो हैं। वह बंगाल बीजेपी में पार्टी के प्रमुख चेहरा थे। साथ ही वह जाने-माने कलाकार रहे हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले बाबुल सुप्रियो ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा। पार्टी ने उन्हें आसीमांदिनी से टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए। इसके बाद वह 2022 में बल्लीगंज में हुए उपचुनाव लड़े और जीतकर विधानसभा पहुंचे। बाबुल सुप्रियो की बंगाल के मशहूर गायक हैं। वह बॉलीवुड से लेकर राम भक्ति के गाने गा चुके हैं।

जिस तरह से बीजेपी बंगाल में हिंदुत्व एजेंडे पर आगे बढ़ रही है, ऐसे में बीजेपी के खिलाफ टीएमसी को एक ऐसा मजबूत हिंदू चेहरा मिला है जो बंगाल की लगभग 70 फीसदी हिंदू आबादी को आकर्षित कर सकता है। बीजेपी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में कुछ हद तक अपने पाले में कर लिया था। इसलिए टीएमसी इस बार के चुनाव में बड़े हिंदु नेता, जो बीजेपी से ही आया हो, उसे राज्यसभा भेज रही है। बाबुल जैसे चेहरों की मौजूदगी से पार्टी को 'हिंदू-विरोधी' टैग से निजात पाने में मदद मिलेगी।
मेनका गुरुस्वामी सशक्तिकरण का चेहरा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए देश की संसद में पहली LGBTQ समुदाय से संबंध रखने वाली मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा के लिए नामित किया। मेनका गोस्वामी सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ महिला अधिकारों की कट्टर समर्थक हैं। ममता बनर्जी की महिला पावर रणनीति के तहत मेनका को राज्यसभा भेजा जाना पार्टी की महिलाओं को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील हैं। गुरुस्वामी देश की उन वकीलों में शामिल रही हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में LGBTQ समुदाय के लिए ऐतिहासिक संवैधानिक केस लड़ा था। इसके बाद साल 2018 में IPC की धारा 377 के रद्द होने के बाद भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया था। मेनका गुरुस्वामी ने साल 1997 में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के अंडर अपना करियर शुरू किया।

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मेनका जैसे चेहरे तृणमूल कांग्रेस को नारीवादी इमेज दिलाने में मददगार साबित होंगे। राज्यसभा पहुंचकर मेनका महिला आरक्षण बिल, घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अन्य सामाजिक अन्याय जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाने वाली हैं।
राजीव कुमार बंगाली बुद्धिजीवी के प्रतीक?
राजीव कुमार एक पश्चिम बंगाल कैडर के पूर्व IPS अधिकारी हैं। वह ममता बनर्जी के बेहद करीबी अधिकारी रहे हैं। वर्तमान में वह टीएमसी के रणनीतिकारों में शामिल हैं और पार्टी के संगठनात्मक कामों को संभालने में भूमिका निभाते हैं। राजीव कुमार बंगाली बुद्धिजीवियों और पढ़े-लिखे वर्ग के बीच काफी लोकप्रिय हैं। ममता बनर्जी उन्हें राज्यसभा भेजकर वफादारी का इनाम भी दे रही हैं। राजीव कुमार की राज्य में सॉफ्ट इमेज है, जो उन्हें समाज में एक प्रभावशाली व्यक्तिव बनाती है।

राजीव कुमार पुलिस बैकग्राउंड से आते हैं। वह सीबीआई और अन्य केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों के खिलाफ टीएमसी की सुनियोजित पैरवी करते हैं। राज्यसभा सदस्य के रूप में वे बंगाल के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की बेहतरी पर जोर देंगे और केंद्र की एजेंसियों के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।
कोयल मलिक से बंगाल में फिल्मी सियासत
कोयल मलिक बॉलीवुड और बंगाल फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री रही हैं। बंगाली सिनेमा इंडस्ट्री से उनका गहरा कनेक्शन है। वह अपनी ग्लैमरस लेकिन सादगी भरी छवि के कारण बंगाल में युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं। वह चुनाव के दौरान प्रचार के दौरान युवाओं की भीड़ को टीएमसी के लिए खिंच सकती है। सीएम ममता बनर्जी ने कोयल को राज्यसभा भेजकर एक स्मार्ट राजनीतिक चाल चलने की कोशिश की है। यह दांव युवा और सिनेमा प्रेमी वोटर्स को खासतौर से टारगेट करने के मकसद से है।

