संजय सिंह, पटना: बिहार की राजनीति इन दिनों तेज़ उबाल पर है। नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन की अटकलें और भी तेज़ हो गई हैं। नए मुख्यमंत्री के नाम, सरकार के स्वरूप और सत्ता समीकरण को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। सत्ता के इस संभावित बदलाव के बीच सत्ताधारी गठबंधन के नेता दिल्ली से लेकर नागपुर तक लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई वरिष्ठ नेता इन दिनों दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की कोशिशों में जुटे हैं। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी तीन दिनों तक दिल्ली में डेरा डाले रहे। इस दौरान उन्होंने अमित शाह से मुलाकात की। हालांकि, इस बैठक को पूरी तरह अनौपचारिक और गोपनीय रखा गया। खास बात यह रही कि इस मुलाकात की कोई तस्वीर या आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे सियासी अटकलों को और बल मिला है।
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दिल्ली में बैठकों का यह दौर ऐसे समय में चल रहा है, जब बिहार में नई सरकार के गठन की संभावनाएं प्रबल मानी जा रही हैं। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर बेहद सतर्क है और अंतिम निर्णय शीर्ष स्तर पर ही लिया जाएगा। यही वजह है कि कई नेता लगातार दिल्ली का रुख कर रहे हैं लेकिन सभी को शीर्ष नेतृत्व से मिलने का समय नहीं मिल पा रहा है। इधर, संघ की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
BJP नेता प्रेम कुमार पहुंचे नागपुर
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार नागपुर पहुंच चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय में संघ के पदाधिकारियों से मुलाकात की। मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह संघ के संस्थापक डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते नजर आए। इस दौरे को भी बिहार की बदलती राजनीतिक स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।
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राज्य में दूसरी ओर, नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ में व्यस्त हैं। इस यात्रा के दौरान उनके साथ दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भी मौजूद हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा सिर्फ विकास कार्यों का निरीक्षण भर नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। पुराने अनुभव बताते हैं कि बिहार की राजनीति में ऐसे बदलाव अचानक होते रहे हैं। 2013 में बीजेपी-जनता दल (यूनाइटेड) का गठबंधन टूटना हो या 2017 में फिर से गठबंधन बनना, राज्य की सियासत हमेशा अप्रत्याशित मोड़ों के लिए जानी जाती रही है। इसी परंपरा के बीच एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की आहट सुनाई दे रही है।
अब सब की निगाहें दिल्ली और नागपुर पर टिकी हैं, जहां से बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक अटकलों और सियासी हलचलों का यह दौर यूं ही जारी रहने वाला है।
