पंजाब की राजनीति में कल उस समय हलचल तेज हो गई जब पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया की नशा विरोधी पदयात्रा में शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर बादल और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मी एक साथ दिखे। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने तुरंत इस यात्रा की तस्वीरें शेयर कर इस यात्रा पर सवाल उठाए। कांग्रेस प्रधान ने तो इस यात्रा को समझौता एक्सप्रेस करार दिया। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद एक बार फिर अकाली दल और बीजेपी के एक साथ आने की अटकलें तेज हो गई हैं। 

 

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया नशा विरोधी पैदल मार्च निकाल रहे थे। इस मार्च में उनके साथ सुखबीर बादल और अश्वनी शर्मा नजर आए। हालांकि, यह सिर्फ एक नशा विरोधी मार्च है लेकिन सुखबीर बादल और अश्वनी शर्मा का गुलाबचंद कटारिया के साथ होना पंजाब में करवट लेती सियासत की ओर इशारा माना जा रहा है। अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन को लेकर एक बार फिर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। 

 

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अकाली दल चाहता है गठबंधन

अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी लंबे समय तक एक दूसरे के साथ रहे। 2020 में कृषि कानूनों के कारण दोनों एक दूसरे से अलग हो गए थे। विरोध के बाद किसान कानून तो वापिस हो गए लेकिन बीजेपी और अकाली फिर से साथ नहीं आए। हाालांकि, अकाली दल बीजेपी के साथ गठबंधन चाहता है। अकाली दल पंजाब की सत्ता में आने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है लेकिन अपने पुराने सहयोगी के बिना अकाली दल की राह आसान नहीं है। अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने बीजेपी के सामने गठबंधन को लेकर कुछ शर्तें रखी हैं। अकाली दल का कहना है कि गठबंधन तभी होगा जब बीजेपी अकाली दल की शर्तों को मानेगी। 

 

  • सिखों के धार्मिक स्थानों में दखल ना दिया जाए। SGPC को कमजोर करने की कोशिश ना करें और हरियाणा SGPC के अलग से चुनाव ना हों।
  • पंजाब के पानी के मुद्दों पर बात हो। बाहरी लोगों को BBMB में जगह ना दी जाए। हरियाणा और राजस्थान के प्रतिनिधियों को BBMB में जगह ना दी जाए।
  • बंदी सिखों को रिहा किया जाए। आरोप है कि सिखों को केंद्र सरकार निशाना बना रही है।
  • पंजाब यूनिवर्सिटी समेत अन्य संस्थानों में केंद्र दखल ना दे। 
  • MSP और किसानों के मुद्दों पर बातचीत शुरू की जाए।

दो भागों में बंटी बीजेपी

 

भारतीय जनता पार्टी के नेता पंजाब में किसी स्पष्ट नीति पर काम करते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। एक तरफ तो कुछ नेता अकाली दल के साथ गठबंधन की बात करते हैं तो दूसरी तरफ कुछ नेता इस गठबंधन का विरोध कर रहे हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अब बीजेपी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर बीजेपी अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करती तो पंजाब में 2031 में भी सत्ता में नहीं आ सकती। पंजाब बीजेपी अध्यक्ष ने भी अकाली दल के साथ गठबंधन की बात कही लेकिन अभी तक केंद्रीय नेतृत्व ने इस पर कोई फैसला नहीं किया है।

 

पंजाब बीजेपी के ही कुछ नेता हैं जो अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करना चाहते। ऐसे नेताओं को हरसिमरत कौर ने भी जवाब दिया और कहा कि बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व को गुमराह करने वालों की दुकानें अकाली-बीजेपी गठबंधन के कारण बंद हो जाएंगे। यही कारण है कि वे गठबंधन नहीं होने दे रहे। 

 

साथ दिखे सुखबीर-अश्वनी शर्मा

गुलाब चंद कटारिया को राजनीति का मंजा हुआ खिलाड़ी माना जाता है। भले ही वह पंजाब के राज्यपाल हैं लेकिन उनके राजनीतिक कद को कम नहीं आंका जा सकता। पंजाब बीजेपी के कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा अब तक अकाली दल के साथ गठबंधन का विरोध करते रहे लेकिन अब खुद सुखबीर बादल के साथ नजर आ रहे हैं। ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अश्वनी शर्मा भी अकाली दल के साथ गठबंधन की पैरवी करने वाले हैं। अगर ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में बीजेपी-अकाली गठबंधन की राह आसान हो जाएगी।

 

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भले ही गठबंधन को लेकर फैसला अभी कुछ समय बाद हो लेकिन दोनों नेताओं के साथ आने से साफ हो गया है कि दोनों दलों के बीच को कड़वाहट नहीं है। बीजेपी अभी अपनी स्थिति का आकलन कर रही है और उसके बाद ही कोई कदम उठाएगी। 

कौन कर रहा पैरवी?

दोनों दलों के नेता गठबंधन को लेकर बयानबाजी करते रहे हैं लेकिन किसी ने भी अभी तक अपने दल के सीनियर नेतृत्व से गठबंधन की पैरवी नहीं की है। इस पदयात्रा में सुखबीर बादल और अश्वनी शर्मा के साथ एक तीसरा व्यक्ति भी गुलाब चंद कटारिया के साथ दिखा। इस व्यक्ति को इस गठबंधन का सूत्रधार माना जा रहा है। इस यात्रा में डेरा ब्यास मुखी गुरिंदर सिंह ढिल्लों भी मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी ने गठबंधन की अटकलों को और ज्यादा हवा दी है। गुरिंदर ढिल्लों को बीजेपी और अकाली दल दोनों का करीबी माना जाता है। क्या डेरा ब्यास मुखी की इस गठबंधन में कोई भूमिका है इसको लेकर अब पंजाब के सियासी गलियारों में खासी चर्चा है।