2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष बदलने से लेकर पूरी प्रदेश कार्यकारिणी के पुनर्गठन तक मंथन चल रहा है। कांग्रेस इस बार जातीय और सामाजिक समीकरणों को केंद्र में रखकर संगठन तैयार करना चाहती है। चर्चा है कि ओबीसी, मुस्लिम और दलित नेतृत्व को आगे लाकर पार्टी 2027 की चुनावी लड़ाई में नई ऊर्जा भरने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में सात बड़े नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। आराधना मिश्रा 'मोना', राकेश राठौर, इमरान मसूद, प्रमोद तिवारी, तनुज पुनिया, दीपक सिंह और विवेक बंसल को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सीतापुर से सांसद राकेश राठौर और सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद सबसे आगे बताए जा रहे हैं। राकेश राठौर ओबीसी समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं, जबकि इमरान मसूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम नेतृत्व के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस दोनों वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से इनमें से किसी एक पर दांव लगा सकती है।
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अजय राय को बदलने की चर्चा क्यों?
अजय राय को 17 अगस्त 2023 को बृजलाल खाबरी की जगह उत्तर प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। अगस्त 2026 में उनका तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़कर पार्टी की मौजूदगी दर्ज कराई थी। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अजय राय भूमिहार समाज से आते हैं, जिसकी उत्तर प्रदेश में आबादी अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। साथ ही भूमिहार मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा परंपरागत रूप से बीजेपी के समर्थन में माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस ओबीसी या मुस्लिम चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने की रणनीति पर विचार कर रही है।
'जिसकी जितनी आबादी' की रणनीति पर फोकस
राहुल गांधी लगातार 'जिसकी जितनी आबादी, उतनी हिस्सेदारी' का मुद्दा उठा रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस संगठन को भी उसी सामाजिक संतुलन के आधार पर तैयार करने की कवायद चल रही है। पार्टी ओबीसी, दलित और मुस्लिम वर्ग को संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व देकर नए वोट बैंक को साधने की कोशिश कर सकती है।
हाल ही में कांग्रेस ने लखनऊ में कांशीराम जयंती को 'सामाजिक परिवर्तन दिवस' के रूप में मनाया था। इसके बाद अनुसूचित जाति विभाग की गतिविधियां भी तेज हुईं। पार्टी सूत्रों का मानना है कि दलित समाज के बीच संगठन की सक्रियता बढ़ाने के लिए भी नई जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं।
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बहुजन समाज पार्टी से संवाद की चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेताओं ने हाल के दिनों में बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात का प्रयास भी किया था। हालांकि मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन इसके बाद कांग्रेस और बहुजन समाज के बीच संभावित राजनीतिक संवाद को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया। इस संबंध में किसी भी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस का आगामी संगठन केवल पदों का बंटवारा नहीं होगा, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की पूरी रणनीति की नींव बनेगा। अब सभी की नजर कांग्रेस हाईकमान के अंतिम फैसले पर टिकी है कि प्रदेश की कमान किस चेहरे को सौंपी जाती है।


