संजय सिंह, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रचंड जीत के बावजूद शायद एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। बांका जिले के मंदार महोत्सव में मतभेद खुलकर तब देखने को मिले जब एनडीए के पांच विधायकों ने जदयू सांसद गिरधारी यादव के भाषणों का बहिष्कार कर दिया। मंच से विधायकों को उठता देख समर्थकों ने भी वहां से जाना ही उचित समझा। मंदार महोत्सव में दिखी इस खींचतान की धमक प्रदेश भर में सुनाई पड़ रही है। विधायकों की नाराजगी पटना तक भी पहुंच गई है।
क्यों नाराज हैं विद्यायक?
जदयू सांसद गिरधारी यादव चुनाव से पहले ही विवादों में थे। उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर SIR के खिलाफ बयान दिया था। इसके अलावा बेलहर से जदयू विद्यायक मनोज यादव के साथ उनका छत्तीस का आंकड़ा है। विधानसभा चुनाव में गिरधारी यादव ने अपने बेटे चाणक्य प्रकाश को राजद के टिकट पर बेलहर से उतारा था। सांसद के बेटे के आने से मनोज यादव की परेशानी बढ़ गई थी। हालांकि वह चुनाव जीतने में कामयाब रहे, लेकिन पिता और पुत्र के अलग-अलग दलों से होने का बुरा असर बांका की अन्य सीटों पर पड़ा। यही कारण है कि एनडीए के अन्य विधायक भी सांसद से खफा हैं।
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विधायक मनोज यादव ने क्या कहा?
विधायक मनोज यादव ने प्रशासन पर मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परंपरा के मुताबिक मंदार महोत्सव समारोह की अध्यक्षता स्थानीय विधायक करते है। मगर अधिकारीयों ने यह मौका सांसद को दे दिया। मेले के विषय में विधयाकों के साथ बैठक भी नहीं की। उन्होंने आगे कहा कि सांसद की अध्यक्षता के विरोध में उन्होंने मंच छोड़ा है।
मंच छोड़ने वालों में सबसे पहले धुरिया के जदयू विद्यायक मनीष कुमार थे। उसके बाद बांका के विद्यायक रामनारायण मंडल थे। मंडल का कहना है कि उन्हें कार्यकर्ताओं से मिलना था। यह वजह से चले गए थे। कटोरिया से पहली बार विद्यायक बने पूरनलाल टुड्डू भी मंच से उतर गए । उनसे जब पूछा गया तो उन्होंने सांसद के बहिष्कार के दावे का खंडन नहीं किया। पूर्व मंत्री और अमरपुर के विद्यायक जयंत राज कुशवाहा भी मंच पर नहीं टिके। स्थिति तब और विकट हो गई जब भाजपा के जिला अध्यक्ष ब्रजेश कुमार मिश्रा और जदयू जिला अध्यक्ष भी मंच से नीचे आ गए। सांसद का भाषण सबसे बाद में होना था। मगर उससे पहले ही विधायकों के मंच से उतरने की चर्चा पटना तक है।
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सांसद ने भी बना रखी दूरी
बेटे को चुनाव हार जाने के बाद से सांसद गिरधारी यादव ने भी विधायकों से दूरी बना रखी है। जदयू कार्यकर्ता सम्मलेन के दौरान मंच पर नहीं पहुंचे थे। विधानसभा चुनाव में भी उनकी मंच से दूरी दिखी। पार्टी के बैनर और पोस्टर से भी उनका नाम और चेहरा गायब है।
