राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने छह सांसदों के साथ आम आदमी पार्टी छोड़ने और सभी के साथ बीजेपी में जाने का ऐलान किया। अब सवाल उठ रहा है कि पिछले एक साल से संसद में जनहित के मुद्दे उठाने वाले राघव चड्ढा ने पार्टी क्यों छोड़ी? एक वक्त आम आदमी पार्टी में उनका कद बेहद प्रभावशाली था। पंजाब में विपक्षी उन पर सुपर सीएम होने का आरोप लगाते रहे हैं तो फिर ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अचानक पार्टी छोड़नी पड़ी।
राघव चड्ढा ने करीब एक साल से पार्टी की गतिविधियों से दूरी बना ली थी। उन्होंने करीब-करीब किनारा कर लिया था। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो राघव चड्ढा ने कहा तब मैं कुछ बोलता नहीं था। मैं प्रयास कर रहा था कि चीजें कुछ बेहतर हों। उन्होंने आगे कहा, 'पिछले कुछ वर्षों से मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं।
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राघव चड्ढा ने शुक्रवार को खुद ही आम आदमी पार्टी छोड़ने की कई वजह बताई। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। इस कारण अलग होने का फैसला लेना पड़ा है। चड्ढा ने अपने बयान में कहा,'जिस आम आदमी पार्टी को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल विचारधारा से भटक गई है। अब यह पार्टी राष्ट्रहित में नहीं, बल्कि अपने निजी हित के लिए काम करती है।
कहां से शुरू हुआ मामला?
हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाया था। उनकी जगह अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तब आम आदमी पार्टी ने उन पर बीजेपी के प्रति नरम रुख अपनाने और डरने का आरोप लगाया था। आप ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के वॉकआउट के समय राघव चड्ढा ने वॉकआउट नहीं किया। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने वाली याचिका पर हस्ताक्ष भी नहीं किया। राघव चड्ढा डर गए हैं, इसलिए बेकार के मुद्दे उठाते हैं।
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क्या आप ने खुद मौका दिया?
राघव चड्ढा ने आप के आरोपों को सफेद झूठ करार दिया और अपने खिलाफ सुनियोजित हमला बताया। एक्स पर लिखा था, मेरे खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चल रहा है। वही भाषा, वही शब्द, वही आरोप। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हमला है। पहले तो मैंने सोचा कि मुझे जवाब नहीं देना चाहिए। फिर मैंने सोचा कि अगर झूठ को सौ बार दोहराया जाए तो शायद कुछ लोग उस पर विश्वास कर लें। इसलिए मैंने जवाब देने का फैसला किया।'
चड्ढा ने आगे कहा था कि मैं घायल हूं, इसलिए घातक हूं। अब पार्टी के सात सांसदों को तोड़कर राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी को सबसे बड़ जख्म दिया है। कुछ रणनीतिकारों का मानना है कि राघव चड्ढा ने पहले ही आप से दूरी बनाने का विचार बना लिया था। मगर पार्टी ने उन्हें डिप्टी लीडर के पद से हटाकर और निजी हमला करके मौका दिया।
