पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट ने शुक्रवार को अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक FIR दर्ज की है। अभिषेक बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर अपने भाषणों में भड़काऊ और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। 

बिधाननगर में राजीव सरकार की शिकायत पर यह केस दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने केंद्र के मंत्रियों और अन्य दलों के खिलाफ संसदीय मर्यादा के बाहर, आपत्तिजनक और उकसाने वाली बातें कहीं थीं। 

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किस मामले में फंसे हैं अभिषेक बनर्जी?

यह शिकायत 5 मई को दर्ज की गई थी, जो चुनाव नतीजे आने के एक दिन बाद थी। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 192, 196, 351(2) और 353(1)(c) और जनप्रतिनिधि कानून की धारा 123(2) और 125 के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

किन धाराओं में केस हुआ, उनमें क्या?

  • भारतीय न्याय संहिता
    धारा 192: लोक शांति भंग करने के इरादे से उकसाना 
    धारा 196: विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना 
    धारा 351(2): आपराधिक धमकी 
    धारा 353(1)(c): मानहानि  
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 
    धारा 123(2): असम्यक असर डालना (Undue Influence)
    धारा 125: चुनावों के सिलसिले में अलग-अलग वर्गों के बीच दुश्मनी बढ़ाना

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क्या था मामला?

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बिधाननगर नॉर्थ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। चुनाव से पहले कथित रूप से भड़काऊ बयान देने, डीजे बजाने संबंधी टिप्पणियों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ बयानबाजी के आरोप में यह कार्रवाई हुई है।

अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा है?

अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को कहा था, 'यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हम हर गैरकानूनी काम, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग को हर उपलब्ध संवैधानिक और कानूनी रास्ते से चुनौती देंगे। हमें माननीय सुप्रीम कोर्ट और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा है।'