भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी अनोखी परंपराओं और मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं में से एक है दादाजी धूनी वाले मंदिर, जिसने अपनी अलग परंपरा की वजह से भक्तों के बीच खास जगह बनाई है। जहां देश के अधिकांश मंदिरों में सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के दौरान गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, वहीं इस मंदिर में यह परंपरा लागू नहीं होती। यहां का गर्भगृह हर समय खुला रहता है चाहे ग्रहण ही क्यों न हो। इस अनोखी परंपरा के पीछे गहरी आस्था और धूनी संत से जुड़ा एक खास विचार है।

 

दादाजी धूनी वाले मंदिर मध्य प्रदेश के खंडवा में स्थित है। इस मंदिर में  दादाजी धूनी वाले यानी केशवानंद जी महाराज की पूजा की जाती है, जो भारत के महान संतों में से एक माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर के दर्शन मात्र से लोगों की इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। इसके अलावा, अब सवाल उठता है कि ऐसी क्या वजह है, जिसकी वजह से मंदिर के दरबार कभी बंद नहीं होते हैं।

 

यह भी पढ़ें: वृंदावन में इस जगह नहीं पहुंचा कलियुग, टटिया की अनोखी परंपरा का सच जानिए

दरबार बंद न होने की वजह 

माना जाता है कि संत धूनी ने इसी जगह पर समाधि ली थी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धूनी संत के समाधि स्थल पर ग्रह-नक्षत्रों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसी वजह से सूर्यग्रहण से लेकर चंद्रग्रहण तक मंदिर का गर्भगृह बंद नहीं होता। ग्रहण के दौरान भी इस मंदिर में भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं क्योंकि इस समय भी यहां के पुजारी नियमित रूप से पूजा-आरती करते हैं।

 

दादाजी धूनी वाले मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बाकी मंदिरों की तरह दर्शन का कोई निश्चित समय नहीं है। भक्त अपनी इच्छा अनुसार कभी भी दर्शन करने जा सकते हैं यानी 24 घंटे में कभी भी श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं।

 

यह भी पढ़ें: शनिवार को होगा भाग्य परिवर्तन, क्या कह रही हैं आपकी राशियां? पढ़ें राशिफल

दादाजी धूनी वाले मंदिर कैसे जाएं?

दादाजी धूनी वाले मंदिर जाने के लिए आप अपने निवास स्थान से ट्रेन, बस या कार के माध्यम से भोपाल या इंदौर पहुंच सकते हैं। भोपाल से खंडवा लगभग 175 किलोमीटर दूर है, वहीं इंदौर से खंडवा करीब 135 किलोमीटर दूर है। वहां से आप बस या कार के जरिए आसानी से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। खंडवा पहुंचकर आप बस स्टॉप या अन्य स्थानीय साधनों से कुछ ही समय में मंदिर पहुंच सकते हैं।


डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। खबरगांव इसकी पुष्टि नहीं करता है।