उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आज के दिन कई मंदिरों में मंगल भंडारे कराए जा रहे हैं। यह भंडारा हर साल ज्येष्ठ माह में हनुमान मंदिरों के बाहर कराया जाता है। इस साल कुल 8 भंडारे कराए जाएंगे, जिसकी शुरुआत 5 मई से हो चुकी है। आज के दिन 1000 भंडारे कराए जा रहे हैं, जिनमें भंडारों के 348 आयोजकों ने लखनऊ वन ऐप बनवाया है, जिसके जरिए भंडारे का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया है। भंडारे में साफ-सफाई का ध्यान रखने के लिए नगर निगम के सफाई कर्मचारियों को तैनात किया गया है। साथ ही नगर निगम ने भंडारे में फ्री पानी के टैंकर पहुंचाए हैं। भीड़-भाड़ कम करने के लिए जगह-जगह पुलिस की टीमें तैनात की गई हैं।


आज के दिन लखनऊ के अलीगंज के प्राचीन हनुमान मंदिर के बाहर भंडारा रखा गया है। आज के दिन मंदिर के पुजारियों ने हनुमान जी को सोने का मुकुट पहनाकर श्रृंगार किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मंगल भंडारे की वजह से अलीगंज के हनुमान मंदिर के पास भीड़ होगी, जिस कारण वहां जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अब सवाल उठता है कि इस साल 8 बार मंगल भंडारा क्यों होगा, साथ ही यह भी कि मंगल भंडारा कराने का रहस्य और महत्व क्या है।

 

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8 बार क्यों होगा मंगल भंडारा?


ज्येष्ठ महीने में ही हर साल मंगल भंडारा कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हनुमान मंदिर में भंडारा कराने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। इस साल का ज्येष्ठ मास बेहद खास है क्योंकि इस मास में मलमास भी लग रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार मलमास बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान भंडारा या पूजा-पाठ करने से भक्तों के दुख-दर्द कम हो जाते हैं। इसी वजह से इस साल ज्येष्ठ मास में 8 बार भंडारे का आयोजन किया जाएगा।


मंगल भंडारे की शुभ तिथियां क्या हैं?


ज्येष्ठ मास इस साल 30 दिन के बजाय 60 दिन का है। इस महीने के कुछ शुभ दिनों पर मंगल भंडारा रखा जाएगा।


पहला मंगल भंडारा - 5 मई

दूसरा मंगल भंडारा - 12 मई
तीसरा मंगल भंडारा - 19 मई
चौथा मंगल भंडारा - 26 मई
पांचवां मंगल भंडारा - 2 जून
छठा मंगल भंडारा - 9 जून
सातवां मंगल भंडारा - 16 जून
आठवां मंगल भंडारा - 23 जून

 

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मंगल भंडारे का रहस्य क्या है?

लखनऊ का मंगल भंडारा गंगा-जमुनी तहजीब की प्रतीक है, जिसकी शुरुआत करीब 200 साल पहले हुई थी। ऐसा माना जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत एक मुस्लिम राजा ने कराई थी। कुछ कहानियों के मुताबिक लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह ने सबसे पहले अलीगंज के प्राचीन हनुमान मंदिर के बाहर भंडारा कराया था।


कहानियों के अनुसार नवाब वाजिद अली शाह के बेटे की तबीयत खराब थी, जिससे वे बेहद दुखी थे। बेटे की तबीयत ठीक कराने के लिए वे कुछ भी करने को तैयार थे। उसी दौरान किसी व्यक्ति ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें प्राचीन हनुमान मंदिर जाकर प्रार्थना करनी चाहिए। इसके बाद नवाब मंदिर गए और अपने बेटे के लिए प्रार्थना की। हनुमान जी की कृपा से उनके बेटे की तबीयत ठीक हो गई। इससे खुश होकर नवाब वाजिद अली शाह ने मंगलवार को भंडारा रखवाया। भंडारे की यही परंपरा आज भी बरकरार है।