18 अप्रैल से ही भारत में हज यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। इसी वजह से शनिवार के दिन कई महिलाएं सऊदी अरब के लिए रवाना हो गईं। सबसे खास बात यह है कि ये महिलाएं अपने महरम के बिना यानी पति के बिना हज यात्रा करने जा रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में करीब 5,446 मुस्लिम महिलाएं अपने पति के बिना तीर्थयात्रा करने वाली हैं, जिनमें से 4,477 महिलाएं केरल की हैं।
हज यात्रा इस्लाम धर्म की बेहद अहम और खास तीर्थयात्रा है। इस वजह से हर साल लाखों लोग देश और दुनिया से हज के लिए सऊदी अरब के मक्का जाते हैं, जहां इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र स्थल काबा के दर्शन करते हैं। हालांकि, अक्सर महिलाएं अपने पति के साथ हज यात्रा पर जाती हैं लेकिन पिछले कुछ सालों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां महिलाएं अपने पति के बिना भी तीर्थयात्रा कर रही हैं। इन महिलाओं को एलडब्ल्यूएम (LWM) कैटेगरी कहा जाता है। अब सवाल उठता है कि भारत में कब से महिलाएं बिना पुरुष साथी के हज यात्रा कर पा रही हैं।
यह भी पढ़ें: तमिलनाडु में चुनावी किस्से तो खूब सुने, मंदिरों की कहानी पता है?
LWM हज यात्रा कब से शुरू हुआ ?
भारत सरकार ने एलडब्ल्यूएम कैटेगरी यानी 'लेडी विदाउट महरम' महिलाओं की हज यात्रा की शुरुआत साल 2018 में की थी ताकि वह महिलाएं भी हज यात्रा पर जा सके जिनके पति नहीं है। इस कैटेगरी में 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं आती हैं, जो अपने पुरुष साथी के बिना यात्रा करती हैं। इन महिलाओं की यात्रा और सुरक्षा का इंतजाम भारत सरकार करती है।
हज यात्रा में कितने लोग जाएंगे?
इस साल अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत से लगभग 1,75,025 लोग हज यात्रा पर जाने वाले हैं। इनमें से करीब 70 फीसदी लोग भारत सरकार के कोटे से तीर्थयात्रा करेंगे, वहीं 30 फीसदी लोग हज कमेटी की मदद से यात्रा करेंगे।
यह भी पढ़ें: 20 अप्रैल का राशिफल, चंद्रमा की बदलती चाल से क्या आपका भाग्य बदलेगा? जानिए
हज यात्रा में जाने के लिए हर साल लाखों लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं क्योंकि माना जाता है कि काबा में जाकर की गई हर दुआ अल्लाह कबूल करते हैं और व्यक्ति के दुख, दर्द और पीड़ा से निजात दिलाते हैं। इसके अलावा मुस्लिम धर्म में हज इसलिए भी खास है क्योंकि यह इस्लाम के पांच स्तंभों (नियम) में से एक है। माना जाता है कि हर मुसलमान को अपने जीवन में कम से कम एक बार काबा के दर्शन जरूर करने चाहिए।
