इस्लाम धर्म में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद बेहद खास त्योहारों में से एक है। यह त्योहार केवल खुशियां और उत्सव लेकर नहीं आता, बल्कि लोगों को खास सीख भी देता है। इस पर्व के जरिए लोग अल्लाह के प्रति अपना सब कुछ समर्पित करने के भाव को दर्शाते हैं। बकरीद का त्योहार इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से मनाया जाता है, जो साल के आखिरी महीने यानी जिलहिज्जा में पड़ता है। जिलहिज्जा महीना इस्लाम धर्म में सबसे पाक महीनों में माना जाता है। इसी महीने में लोग हज की यात्रा करते हैं।
इस्लामिक कैलेंडर चांद की दिशा पर आधारित होता है। इसी वजह से बकरीद त्योहार की सही तारीख चांद दिखने के मुताबिक तय की जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के मई महीने में ही इस्लामिक कैलेंडर का आखिरी महीना माना जाता है। हर साल की तरह इस साल भी कई लोगों को कन्फ्यूजन है कि आखिर बकरीद का त्योहार कब मनाया जाएगा। जहां एक तरफ कई जानकारों का मानना है कि बकरीद का त्योहार 27 मई के दिन मनाया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ कई लोगों का मानना है कि 28 मई के दिन त्योहार मनाना चाहिए। ऐसे में सही तारीख क्या है, आइए जानते हैं।
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कब मनाई जाएगी बकरीद?
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, जिलहिज्जा महीने में जिस रात चांद दिखेगा, उसके बाद 10वें दिन बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार कई लोगों को उम्मीद थी कि 17 मई की रात को चांद नजर आएगा। जबकि 17 मई के बजाय 18 मई की रात को चांद नजर आया। इसी वजह से इस साल 28 मई के दिन बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। बकरीद के त्योहार में सबसे पहले बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक नमाज अदा करते हैं, उसके बाद बकरी या किसी अन्य जानवर की कुर्बानी दी जाती है।
बकरीद के दिन कुर्बानी परंपरा का रहस्य
इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, एक बार पैगंबर हजरत इब्राहिम अल्लाह को अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करना चाहते थे। अल्लाह के हुक्म पर वह अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे। यह देखकर अल्लाह उनकी समर्पण से खुश हुए और उनके बेटे की जान बचा ली। इसके बदले अल्लाह ने जानवर की कुर्बानी देने का आदेश दिया। तभी से बकरीद के दिन कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई।
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बकरीद के त्योहार में बकरी की कुर्बानी केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि इस परंपरा में कई गहरे अर्थ छिपे हुए हैं। कुर्बानी के जरिए लोग त्याग, समर्पण और जरूरतमंदों की मदद करना सीखते हैं। कुर्बानी के बाद मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहला हिस्सा परिवार के लिए रखा जाता है। दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया जाता है। वहीं तीसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांटा जाता है। इसी तरह यह त्योहार लोगों को मिल-बांटकर खुशियां मनाने की सीख देता है।
नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी की हम पुष्टि नहीं करते
