फरवरी को इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, नौवां महीना यानी रमजान का महीना माना जाता है। यह महीना इस्लाम धर्म के मानने वालों के लिए बेहद खास होता है क्योंकि इसी दौरान एक ओर शब-ए-बारात का त्योहार मनाया जाता है, वहीं दूसरी ओर रमजान के पाक महीने की शुरुआत होती है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार शब-ए-बारात के लगभग 15 दिन बाद रमजान का पाक महीना शुरू होता है। माना जा रहा है कि शब-ए-बारात 3 या 4 फरवरी 2026 को मनाई जा सकती है।

 

हालांकि, इसकी तारीख चांद दिखने पर तय होती है। इसी तरह रमजान की शुरुआत भी चांद देखने पर निर्भर करती है। शब-ए-बारात के बाद से ही लोग रमजान की तैयारियों में जुट जाते हैं। रमजान सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए रोज़ा, इबादत, संयम और दान का महीना होता है। ऐसे में लोग पहले से ही यह जानने को उत्सुक रहते हैं कि इस साल रमजान कब शुरू होगा और ईद-उल-फितर किस दिन मनाई जाएगी।

 

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शब-ए-बारात क्यों मनाई जाती है?

इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात को बेहद पवित्र रात माना जाता है। इसे 'माफी की रात' भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के गुनाह माफ़ करते हैं और रहमत के दरवाजे खोल देते हैं। इस रात लोग पूरी रात जागकर नमाज पढ़ते हैं, कुरान की तिलावत करते (पढ़ते) हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। कई लोग अपने पूर्वजों के लिए दुआ करने कब्रिस्तान भी जाते हैं। कुछ लोग इस दिन रोजा भी रखते हैं और अल्लाह से रहमत की दुआ करते हैं।

2026 में रमजान कब शुरू होगा?

रमजान की शुरुआत इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के अनुसार होती है, जो पूरी तरह चांद दिखने पर आधारित होता है। यही वजह है कि अलग-अलग देशों में रमजान की तारीख अलग हो सकती है। भारत में अनुमान है कि रमजान 19 फरवरी 2026 से शुरू होगा। अगर 18 फरवरी की रात चांद नजर आता है, तो अगले दिन यानी 19 फरवरी से रमजान का पाक महीना शुरू हो जाएगा। रमजान की शुरुआत के साथ ही लोग रोजा रखना शुरू करते हैं, जो पूरे एक महीने तक चलता है। इस दौरान लोग अल्लाह की इबादत, नमाज़ और दान-पुण्य में समय बिताते हैं।

 

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ईद-उल-फितर कब मनाई जाएगी?

अनुमान के अनुसार रमजान का महीना 20 मार्च 2026 को खत्म होगा। इसके अगले दिन यानी 21 मार्च 2026 शनिवार को ईद-उल-फितर मनाई जा सकती है। हालांकि, ईद की तारीख भी चांद दिखने पर एक दिन आगे या पीछे हो सकती है। कुल मिलाकर ईद 20 या 21 मार्च को पड़ने की संभावना है।

 

ईद के दिन पुरुष मस्जिदों में सामूहिक रूप से नमाज अदा करते हैं, जबकि महिलाएं घरों में नमाज़ पढ़कर सभी की सुख-शांति के लिए दुआ करती हैं। नमाज के बाद घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं, रिश्तेदारों और दोस्तों को ईद की मुबारकबाद दी जाती है। बच्चों को ईदी दी जाती है और गरीब व जरूरतमंद लोगों को भोजन व धन दान करने की विशेष परंपरा होती है।