2026 साल का दूसरा महीना फरवरी है, जिसे हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास कहा जाता है। यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल का अंतिम महीना होता है। फाल्गुन मास सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस महीने में अनेक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं कारणों से श्रद्धालुओं में इस महीने को लेकर विशेष उत्सुकता बनी रहती है।

 

वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की शुरुआत 2 फरवरी 2026 से होगी और इसका समापन 3 मार्च 2026 को होगा। वहीं 4 मार्च 2026 से चैत्र मास का आरंभ होगा। फाल्गुन मास को भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्ण का पावन महीना माना जाता है। इसी माहीने में एक ओर महाशिवरात्रि का महान पर्व मनाया जाता है, तो दूसरी ओर भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय पर्व होली की गुंज भी बड़े हर्षोल्लास के साथ शुरू जाता है। आइए जानते हैं कि फाल्गुन माहीने में कौन-कौन से व्रत और त्योहार किस तिथि को मनाए जाएंगे।

 

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व्रत और त्योहारों की लिस्ट

यशोदा जयंती

 

तिथि- 7 फरवरी 2026
यशोदा जयंती भगवान श्रीकृष्ण की माता यशोदा मैया के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन माता यशोदा और बाल गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। हालाँकि यशोदा मैया श्रीकृष्ण की सगी माता नहीं थीं, फिर भी उन्होंने उन्हें सच्चे मातृत्व और वात्सल्य प्रेम से पाला। इसी कारण भक्त उन्हें श्रीकृष्ण की मैय्या के रूप में पूजते हैं। इस दिन व्रत रखने से पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति मिलती  है।

 

शबरी जयंती

 

तिथि- 8 फरवरी 2026
शबरी जयंती माता शबरी की अटूट भक्ति और श्रद्धा को समर्पित है। राम भक्तों के लिए शबरी के बेर की कथा आज भी ईश्वर भक्ति की प्रेरणा देती है। इस दिन भक्त भगवान श्रीराम और माता शबरी को स्मरण करते हैं।

 

जानकी जयंती

 

तिथि - 9 फरवरी 2026
जानकी जयंती को सीता नवमी या सीता अष्टमी भी कहा जाता है। यह माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस दिन माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और दान-पुण्य करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

 

विजया एकादशी

 

तिथि -14 फरवरी 2026
विजय एकादशी का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान से इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में विजय मिलता है।

 

महाशिवरात्रि

 

तिथि - 15 फरवरी 2026
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का महापर्व है। इस दिन शिव भक्त व्रत रखकर रात्रि जागरण करते हैं। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी सुबह 9 बजकर 16 मिनट शुरु होगा और 16 फरवरी सुबह 7 बजकर 25 मिनट पर खत्म होगा।

 

फाल्गुन अमावस्या

 

तिथि - 17 फरवरी 2026
फाल्गुन अमावस्या सुख, संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन पितरों के नियमित दान, स्नान और व्रत करने का विशेष महत्व है।

 

फुलेरा दूज

 

तिथि - 19 फरवरी 2026
फुलेरा दूज विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित पर्व है। ‘फुलेरा’ शब्द का अर्थ फूलों से है। इस दिन भगवान कृष्ण के साथ फूलों की होली खेली जाती है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह पर्व बड़े आनंद से मनाया जाता है।

 

ढुण्ढिराज चतुर्थी

 

तिथि- 21 फरवरी 2026
ढुण्ढिराज चतुर्थी काशी (वाराणसी) में पूजे जाने वाले भगवान गणेश के ढुण्ढिराज स्वरूप को समर्पित है। इन्हें काशी का प्रथम देवता माना जाता है।

 

होलाष्टक

 

तिथि- 24 फरवरी 2026 से
होलाष्टक कोई पर्व नहीं है, बल्कि होली से पहले के आठ दिन होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य नही करने चाहिए , क्योंकि इस दिन को  नकारात्मक ऊर्जा से युक्त समय माना जाता है।

 

रोहिणी व्रत

 

तिथि - 25 फरवरी 2026
रोहिणी व्रत का जैन धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन जैन महिलाएँ भगवान वासुपूज्य की पूजा करती हैं और पति की लंबी आयु तथा सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

 

रवि प्रदोष व्रत

 

तिथि- 1 मार्च 2026
रवि प्रदोष व्रत में भगवान शिव और सूर्य देव की पूजा की जाती है। यह व्रत विशेष रूप से आरोग्य और यश प्रदान करने वाला माना जाता है।

 

होलिका दहन

 

तिथि- 3 मार्च 2026
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन होलिका की अग्नि में नकारात्मक भावनाओं और बुराइयों को जलाकर खत्म करने की परंपरा है।