सनातन धर्म में जहां एक तरफ मां लक्ष्मी को धन, सुख, शांति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ लक्ष्मी की बड़ी बहन अलक्ष्मी जी को गरीबी, अशांति, गंदगी और कलह का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन लोगों के घर में अशांति और कलह होती है, उन घरों में अलक्ष्मी का निवास हो जाता है। इसके अलावा पौराणिक कथा के अनुसार, अलक्ष्मी का निवास न सिर्फ गंदगी, अशांति और अंधेरे में होता है, बल्कि पीपल के पेड़ पर भी अलक्ष्मी जी निवास करती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन में लक्ष्मी जी से पहले अलक्ष्मी जी उत्पन्न हुई थीं, जिनके हाथ में मदिरा थी। अलक्ष्मी जी का रूप बाकी देवियों से बिल्कुल अलग था, जिस वजह से कोई भी देवता उनसे विवाह नहीं करना चाहता था। अलक्ष्मी जी के बाद लक्ष्मी जी समुद्र मंथन से प्रकट हुईं, जिन्होंने भगवान विष्णु से विवाह करने की इच्छा जाहिर की थी। लक्ष्मी जी ने शादी से पहले भगवान विष्णु के सामने एक शर्त रखी थी, जिसके मुताबिक वह तभी विवाह करेंगी जब उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी जी का भी विवाह कराया जाएगा। इस शर्त को भगवान विष्णु ने पूरा किया। अब सवाल उठता है कि अलक्ष्मी जी का विवाह किससे हुआ और उनका निवास स्थान पीपल का पेड़ कैसे बना।
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विष्णु भगवान ने कैसे कराया अलक्ष्मी जी का विवाह ?
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, कोई भी देवता अलक्ष्मी जी से विवाह नहीं करना चाहता था क्योंकि वे गंदगी में रहती थीं। लक्ष्मी जी की शर्त के अनुसार, भगवान विष्णु अलक्ष्मी जी के लिए एक योग्य वर की तलाश करने लगे। उन्हें पूरे देव लोक में ऐसा कोई देवता नहीं मिला जिसने अलक्ष्मी जी से विवाह करने की सहमति दी हो।
अलक्ष्मी जी के लिए वर की तलाश करते-करते उन्हें उद्दालक ऋषि मिले। भगवान विष्णु ने उन्हें अलक्ष्मी जी से विवाह करने का आदेश दिया। ऋषि उद्दालक ने इस आदेश को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद अलक्ष्मी जी का विवाह उनसे हो गया।
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कैसे बना पीपल का पेड़ अलक्ष्मी जी का निवास स्थान
विवाह के बाद अलक्ष्मी जी उद्दालक ऋषि के साथ उनके घर आईं, जहां साफ-सफाई, हवन और पवित्र वातावरण था। यह सब देखकर अलक्ष्मी जी परेशान हो गईं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे घर में नहीं रह सकतीं, जहां शांति और पवित्रता का निवास हो। तब ऋषि ने उनसे पूछा कि वह कहां रहना चाहती हैं। इस पर अलक्ष्मी जी ने कहा कि उन्हें गंदगी, अशांति और झगड़े वाली जगह पसंद है।
अलक्ष्मी जी का यह जवाब सुनकर ऋषि ने कहा कि वह ऐसी जगह ढूंढकर आते हैं। इसके बाद अलक्ष्मी जी पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर ऋषि का इंतजार करने लगीं। कई दिनों तक ऋषि वापस नहीं लौटे। इससे अलक्ष्मी जी दुखी हो गईं। तब भगवान विष्णु ने कहा कि अब तुम पीपल के पेड़ के नीचे ही रह सकती हो, यही तुम्हारा निवास स्थान होगा।
