सनातन धर्म के कई ग्रंथों में राक्षसों और देवताओं से जुड़ी कथाएं बताई गई हैं, जिन्हें पढ़कर और सुनकर जीवन की कई सीख मिलती हैं। शिव पुराण में वर्णित तारकासुर वध की कथा हमें सिखाती है कि अपनी शक्तियों का अहंकार करना ही विनाश का कारण बनता है। शिव पुराण के अनुसार, तारकासुर ने ब्रह्मा जी को खुश करने के लिए कठोर तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दिया। यही वरदान बाद में उसके विनाश का कारण बना क्योंकि उसे अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया था। इसी घमंड को तोड़ने के लिए भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने उसका वध किया।


भगवान कार्तिकेय, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। उन्होंने अपने पराक्रम और शक्तियों से देवताओं को असुर तारकासुर के आतंक से बचाया था। उनका जन्म देवलोक की रक्षा के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है। अब सवाल उठता है कि तारकासुर के किन पाप कर्मों की वजह से उसका वध किया गया था। साथ ही सवाल उठता है कि तारकासुर का वध कार्तिकेय भगवान ने क्यों किया था?

 

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कैसे मिला तारकासुर को वरदान?


शिव पुराण की कथा के अनुसार, तारकासुर स्वयं को ब्रह्मा जी का परम भक्त मानता था। उसने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी उसके सामने प्रकट हुए और उससे वरदान मांगने को कहे थे। तब तारकासुर ने अमर होने का वरदान मांगा।

 

 जब ब्रह्मा जी ने बताया कि यह संभव नहीं है, तब उसने कहा कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो। ब्रह्मा जी ने उसकी यह इच्छा स्वीकार कर उसे यही वरदान दे दिया। उस समय भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह नहीं हुआ था। इसलिए तारकासुर को विश्वास हो गया कि उसका वध कभी नहीं हो सकेगा।

 

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वरदान बना विनाश की वजह


तारकासुर को लगता था कि भगवान शिव कभी विवाह नहीं करेंगे। उसका मानना था कि न शिव जी का विवाह होगा और न ही उनका कोई पुत्र जन्म लेगा। इसलिए वह स्वयं को अमर समझने लगा। इस वरदान का उसे घमंड हो गया और वह अत्याचार करने लगा। उसने देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया और स्वर्ग लोक पर अपना अधिकार जमा लिया। उसके अत्याचारों से सभी देवता दुखी हो गए।


तारकासुर के उत्पात से परेशान होकर सभी देवता ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह कराया जाए, ताकि उनके पुत्र का जन्म हो और वह तारकासुर का वध कर सके।

 

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भगवान शिव का हुआ विवाह


देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया। विवाह के बाद भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ। भगवान शिव ने कार्तिकेय जी को कैलाश पर्वत का रक्षक बनाया। इसके बाद भगवान कार्तिकेय और तारकासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसमें कार्तिकेय जी ने तारकासुर का वध कर दिया और सभी देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।


नोट- यह लेख धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं करता है।