भारत में पिछले कुछ सालों में विदेशी नस्लों के कुत्तों को पालने का क्रेज काफी ज्यादा बढ़ गया है। गांव हो या शहर लोग विदेशी नस्ल के कुत्तों को बहुत पसंद कर रहे हैं। कुछ खास नस्लों के विदेशी कुत्ते खतरनाक भी होते हैं और कई बार अनचाही घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में कुछ खास नस्लों की पहचान ही उनके खूंखार रवैये के कारण हो गई है। सोशल मीडिया पर भी इस तरह के कुत्ते कई  बार अपने खतरनाक अंदाज के कारण चर्चा में बने हुए हैं। कई कुत्ते बच्चों के लिए बेहद खतरनाक रहते हैं और उनपर अटैक भी कर देते हैं। ऐसे में यह एक चिंता का विषय बन गया था।

 

देश में पालतू कुत्तों पर लंबे समय से नियम-कानून थे लेकिन मार्च 2024 में केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग ने ऐसे कुत्तों की नस्लों की एक सूची बनाई जिन्हें खतरनाक माना गया। इन कुत्तों पर सरकार ने निर्देश जारी किए और इनकी संख्या कंट्रोल करने के लिए भी कहा। सरकार की इस लिस्ट में जिन्हें खतरनाक कैटेगरी में रखा गया है, उनमें  पिटबुल टेरियर, रॉटवीलर, टोसा इनु, अमेरिकन बुलडॉग, अमेरिकन स्टैफोर्डशायर टेरियर, डोगो अर्जेंटीनो, फिला ब्रासीलीरो, बोअरबोल, कांगल, कोकेशियन शेफर्ड डॉग, साउथ रूसी शेफर्ड और कई दूसरे बड़े और ताकतवर कुत्ते शामिल हैं।

 

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23 नस्लों को बताया खतरनाक 

सराकरन ने अपनी लिस्ट मे 23 नस्ल के कुत्तों को रखा है और इन्हें खतरनाक बताया गया है। इन कुत्तों को दूसरे देशों से लाने, उनका प्रजनन यानी ब्रिडिंग करवाने, बिक्री करने और पालतू कुत्ते के तौर पर रखने पर रोक लगाने के निर्देश राज्यों को दिए गए हैं। 

 

इन नस्लों को खतरनाक समझने के पीछे मुख्य वजह यह है कि कई मामलों में इन कुत्तों ने बिना किसी स्पष्ट कारण के हमला किया है जिसमें लोगों को गंभीर चोटें आईं और कुछ मामलों में मौत तक हुई है। पिटबुल टेरियर और रॉटवीलर जैसी नस्लों के कुत्ते बहुत खतरनाक होते हैं और इनका शरीर बहुत ताकतवर होता है। इस नस्ल के कुत्ते अगर इंसान पर हमला कर दें तो यह आम कत्तों से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकता है। अगर बिना सही ट्रेनिंग के इन कुत्तों को रखा जाए तो यह मालिक समेत आसपास रहने वाले सभी लोगों के लिए खतरा हो सकता है। 

यहां देखें लिस्ट

  1. पिटबुल टेरियर
  2. टोसा इनु
  3. अमेरिकन स्टैफर्डशायर टेरियर
  4. फिला ब्राज़िलेइरो
  5. डोगो अर्जेंटीनो
  6. अमेरिकन बुलडॉग
  7. बोएरबोएल
  8. कांगल
  9. सेंट्रल एशियन शेफर्ड डॉग
  10. काकेशियन शेफर्ड डॉग
  11. साउथ रशियन शेफर्ड डॉग
  12. टोर्नजाक
  13. सारप्लानिनाक
  14. अकिता
  15. मास्टिफ
  16. रॉटवाइलर
  17. रोडेशियन रिजबैक
  18. वुल्फ डॉग
  19. प्रेसा कैनारियो
  20. अकबाश डॉग
  21. मॉस्को गार्ड डॉग
  22. केन कॉर्सो
  23. बैंडॉग

नियमों पर बहस

केंद्र सरकार के निर्देश के बाद कई राज्यों और जिलों ने अलग-अलग कदम उठाने शुरू कर दिए। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले ने भी 23 खूंखार नस्लों के कुत्तों की बिक्री और प्रजनन पर रोक लगा दी और जिनके पास पहले से हैं उन्हें उन्हें नसबंदी कराने के आदेश दिए हैं ताकि आगे प्रजनन न हो सके। इस नियम का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाने का नियम भी है लेकिन इस फैसले को लेकर विवाद भी हुआ है।

 

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े फैसले से पहले पालतू जानवरों के मालिकों और संबंधित संगठनों से परामर्श जरूरी था और इसलिए केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश को रद्द कर दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी भी कुत्ते का आक्रमक व्यवहार हो सकता है और इसमें मालिक की जिम्मेदारी सबसे अहम है।

सार्वजनिक सुरक्षा के लिए पाबंदी

सरकार का कहना है कि ऐसे कुत्तों पर पाबंदियां लगाना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। इन खतरनाक नस्लों के कुत्तों के हमले की घटनाओं में बढ़ोतरी के कारण कई परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। बच्चे और बुजुर्गों को इनसे ज्यादा खतरा है और इनकी सुरक्षा के देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया। कुछ शहरों-राज्यों ने तो इसके अलावा भी नियम बनाए हैं। पालतू कुत्तों को पब्लिक में घुमाते समय पट्टा लगाना, खतरनाक नस्लों के कुत्तों के मुंह पर कुछ बांधकर रखना। इन सब के अलावा अलग-अलग नगर निगमों के कुत्तों के रजिस्ट्रेशन को लेकर कई नियम हैं। 

 

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कुत्ते के मालिकों का विरोध

इन नियमों का एक बड़ा हिस्सा समाज की सुरक्षा के लिए है लेकिन इसका असर पालतू कुत्ते पालने वालों और पशु प्रेमियों पर भी पड़ा है। कई लोग कहते हैं कि हर कुत्ता, चाहे वह किसी भी नस्ल का हो, उसे सही ट्रेनिंग, समाजिकरण और काबू में रखना मालिक की जिम्मेदारी होती है और अगर मालिक जिम्मेदार नहीं रहेगा तो किसी भी कुत्ते से खतरा बन सकता है। कई बार इस तरह के मामले सामने आए हैं जहां कुत्ते ने किसी राहगिर को काट दिया और उसके बाद उसका मालिक के साथ विवाद हो गया। कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले में भी यही बात सामने आई कि किसी भी कुत्ते को खतरनाक मानने से पहले उसके मालिक की जिम्मेदारी और ट्रेनिंग को देखना चाहिए। 

 

पाबंदी की लिस्ट में जिन नस्लों को शामिल किया गया है उनमें से कई विदेशी नस्लें हैं जिन्हें भारत में इंपोर्ट किया जाता था। इन नस्लों के कुत्तों को पालतू के तौर पर लोकप्रियता मिली थी लेकिन सरकार और पशु विशेषज्ञों का तर्क है कि इन नस्लों की ताकत और काटने की क्षमता को कंट्रोल करना आम लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है। ऐसे में इन पर नियम और पाबंदियों का उद्देश्य खतरे को कम करना है।