कुत्ते और बिल्ली को पालने का क्रेज भारत में लगातार बढ़ता जा रहा है। शहरों में तेजी से पालतू जानवरों को पालने का ट्रेंड बड़ा है और इसमें कुत्ते के साथ-सात बिल्ली की भी एंट्री हो गई है। बिल्ली कुत्ते की तुलना में छोटी होती है और इसे आसानी से रखा जा सकता है। अगर कोई पूछे कि कुत्ता काटना ज्यादा खतरनाक है या बिल्ली, तो ज्यादातर लोग बिना सोचे कुत्ते का नाम लेंगे। इसके पीछे वजह भी साफ है क्योंकि आम तौर पर कुत्ते को काटने के मामले ही सामने आते हैं। सड़कों पर डॉग बाइट के मामले ज्यादा दिखते हैं और रेबीज का डर भी सबसे ज्यादा कुत्तों से जोड़ा जाता है लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो बिल्ली का काटना भी उतना ही गंभीर हो सकता है और कई मामलों में उससे होने वाला संक्रमण ज्यादा तेजी से फैलता है।

 

डॉक्टरों का कहना है कि लोग अक्सर बिल्ली के काटने को हल्के में ले लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है। कुत्ते के काटने से खतरा जरूर होता है लेकिन बिल्ली के काटने से भी खतरा कम नहीं होता है। बिल्ली का काटना भी खतरनाक है और इससे लोगों की जान को भी खतरा हो सकता है। 

 

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कुत्ते के काटने से रेबीज का खतरा

भारत में रेबीज के ज्यादातर मामले कुत्तों के काटने से जुड़े होते हैं। खासकर आवारा कुत्तों के काटने पर खतरा बढ़ जाता है क्योंकि आम तौर पर आवारा कुत्तों का टीकाकरण नहीं हुआ होता है। संक्रमित कुत्ते की लार के जरिए वायरस शरीर में पहुंचता है और अगर समय पर वैक्सीन न लगे तो यह बीमारी जानलेवा हो सकती है। 

 

डॉक्टरों के अनुसार, कुत्ते के काटने पर घाव बड़ा और गहरा हो सकता है। कई बार शरीर के मांस तक को नुकसान पहुंचता है। बच्चों और बुजुर्गों में इसका खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए रेबीज को लेकर सरकार भी लगातार जागरूकता अभियान चलाती रहती है। 

 

बिल्ली का काटना भी खतरनाक

कुत्ते के काटने से रेबीज होता है इसके बारे में तो ज्यादातर लोगों को पता होता है लेकिन बिल्ली के काटने से भी कम खतरा नहीं होता है। मेडिकल रिसर्च बताती है कि बिल्ली के दांत बेहद पतले और नुकीले होते हैं। जब बिल्ली काटती है तो उसके दांत त्वचा के अंदर गहराई तक पहुंच जाते हैं। ऊपर से घाव छोटा दिखता है लेकिन अंदर बैक्टीरिया तेजी से फैल सकते हैं।

 

डॉक्टरों के मुताबिक बिल्ली के काटने के बाद इंफेक्शन का खतरा काफी ज्यादा होता है। खासकर पाश्चुरेला मल्टोसिडा (Pasteurella multocida) नाम का बैक्टीरिया कई मामलों में गंभीर सूजन और संक्रमण पैदा कर सकता है। कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती तक करना पड़ जाता है।

किसमें ज्यादा होता है इंफेक्शन?

अमेरिका और यूरोप में हुई कई मेडिकल स्टडीज में पाया गया कि बिल्ली के काटने के मामलों में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा होती है क्योंकि संक्रमण तेजी से बढ़ता है। वहीं कुत्ते के काटने में चोट ज्यादा गंभीर होती है लेकिन इंफेक्शन हर केस में नहीं फैलता है। हालांकि डॉक्टर साफ कहते हैं कि दोनों ही मामलों में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

रेबीज का खतरा किससे ज्यादा?

भारत जैसे देशों में रेबीज  सबसे ज्यादा कुत्तों के काटने से फैलकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, देश में रेबीज से होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा मामले डॉग बाइट से जुड़े हैं लेकिन अगर बिल्ली संक्रमित हो तो उससे भी रेबीज फैल सकता है। यानी कुत्ता काटे या बिल्ली रेबीज का खतरना दोनों से है।  यह मान लेना गलत होगा कि बिल्ली काटे तो वैक्सीन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या कहते हैं डॉक्टर?

रेबीज और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट पद्मश्री से सम्मानित डॉ ओमेश कुमार भारती का कहना है कि चाहे कुत्ता काटे या बिल्ली, दोनों ही मामलों में घाव को तुरंत साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है। उनका कहना है कि लोग बिल्ली के काटने को हल्का समझकर इलाज में देरी कर देते हैं, जबकि कई बार इससे गंभीर संक्रमण हो सकता है। उन्होंने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी जानवर के काटने के बाद डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है क्योंकि कई बार शुरुआती लक्षण मामूली दिखते हैं लेकिन अंदर संक्रमण बढ़ता रहता है।

 

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कुत्ते बिल्ली के काटने पर क्या करें?

अगर कुत्ता या बिल्ली काट ले तो सबसे पहले 10 से 15 मिनट तक घाव को साबुन और बहते पानी से धोएं। इसके बाद एंटीसेप्टिक लगाएं और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि बिना सलाह के घरेलू नुस्खे इस्तेमाल नहीं करे चाहिए इससे खतरा ओर ज्यादा बढ़ सकता है। 

 

अगर रेबीज के नजरिए से देखें तो कुत्ते का काटना ज्यादा खतरनाक माना जाता है लेकिन अगर बैक्टीरियल इंफेक्शन और अंदरूनी संक्रमण की बात करें तो बिल्ली का काटना भी बेहद गंभीर हो सकता है। डॉक्टरों की सलाह साफ है कि किसी भी जानवर के काटने को हल्के में नहीं लेना चाहिए।