देश में इन दिनों आवारा कुत्तों को लेकर बड़ी बहस चल रही है। कई राज्यों में डॉग बाइट और रेबीज के मामले बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट से लेकर राज्य सरकारों तक इस मुद्दे पर लगातार सुनवाई और बैठकों का दौर चल रहा है। पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में आवारा कुत्तों को लेकर प्रशासन और स्थानीय निकायों पर दबाव बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार में यह भी शामिल है कि लोग कुत्तों के हमलों के डर के बिना जीवन जी सकें। कोर्ट ने सख्त आदेश दिए हैं कि आवारा कुत्तों को हटाना ही होगा।
सिर्फ कुत्ते ही नहीं बिल्ली, बंदर और गायों को लेकर भी चर्चा हो रही है। देशभर में सड़कों पर आवारा गायों के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई जगह बंदरों और बिल्ली से लोग परेशान हैं। ऐसे में आवारा पशुओं और जानवरों की इस समस्या से निपटने के लिए क्या नियम हैं और इस लगातार बढ़ती समस्या का हल क्या है इसको लेकर चर्चा जारी है। भारत में जानवरों को लेकर कई नियम और कानून बने हुए हैं जिनमें एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स और पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (Prevention of Cruelty to Animals Act) शामिल हैं।
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क्या हैं ABC नियम?
भारत में एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (Prevention of Cruelty to Animals Act) के तहत बनाए गए हैं। इनका मकसद जानवरों की आबादी को मानवीय तरीके से कंट्रोल करना है। केंद्र सरकार ने सबसे पहले एनिमल बर्थ कंट्रोल (डॉग) रूल्स, 2001 लागू किए थे। इसके बाद कई बार इन नियमों में बदलाव किए गए और आखिरकार 10 मार्च 2023 को केंद्र सरकार ने नए एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 लागू कर दिए।
यानी आधिकारिक तौर पर ये नियम पहली बार 2001 में आए और फिर 2023 में इन्हें पूरी तरह संशोधित कर नया ढांचा तैयार किया गया। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) की वेबसाइट और केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक 2023 के नियमों ने 2001 के नियमों की जगह ली।
नए नियमों में क्या बदला?
एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 में CNVR मॉडल को अपनाया गया है। इसका मतलब है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी की जाएगी, रेबीज वैक्सीन लगाई जाएगी और फिर उन्हें उसी इलाके में छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था। नियमों में साफ कहा गया है कि स्थानीय निकायों को कुत्तों को मारने या कहीं दूर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। केवल रेबीज से संक्रमित, गंभीर रूप से बीमार या अत्यधिक आक्रामक जानवरों के मामलों में अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं। हालांकि, अब तक सरकारों ने और स्थानीय निकायों ने इन नियमों को गंभीरता से नहीं लिया था। यही वजह है कि आवारा जानवरों और कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है।
2023 के नियमों में कम्यूनिटी डॉग शब्द भी जोड़ा गया। इसमें उन कुत्तों को शामिल किया गया है जो किसी व्यक्ति के नहीं होते लेकिन किसी इलाके में रहते हैं। नियमों के मुताबिक ऐसे जानवरों की देखभाल, भोजन और टीकाकरण को लेकर स्थानीय निकायों और पशु कल्याण संगठनों की जिम्मेदारी तय की गई है।
कौन लागू करता है ये नियम?
केंद्र सरकार के मुताबिक आवारा पशुओं का प्रबंधन राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। नगर निगम, नगर पंचायत और नगर पालिकाओं को एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम चलाना होता है। इसके लिए उन्हें पशु चिकित्सकों, NGOs और पशुओं के हित में काम करने वाली संस्थाओं की मदद लेनी होती है। एमिमल वेलफेयर बॉर्ड ऑफ इंडिया ने यह भी साफ किया है कि कोई भी संस्था बिना अनुमति एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम नहीं चला सकती। इसके लिए बोर्ड से सर्टिफिकेट लेना जरूरी है।
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क्या सिर्फ कुत्तों पर लागू होते हैं ये नियम?
शुरुआत में ABC नियम मुख्य रूप से आवारा कुत्तों के लिए बनाए गए थे लेकिन अब कई राज्यों और नगर निगमों ने इन्हें बिल्लियों पर भी लागू करना शुरू किया है। महाराष्ट्र के नासिक नगर निगम ने 2025 में बिल्लियों की संख्या कम करने के लिए कई प्रोग्राम चलाए गए। हालांकि, गायों और बंदरों के लिए देशभर में एक समान एनिमल बर्थ कंट्रोल कानून मौजूद नहीं है। गायों को लेकर अलग-अलग राज्यों में गौशालाएं हैं। वहीं बंदरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए वन विभाग समय-समय पर अलग-अलग प्रोग्राम चलाता है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई विशेष कानून नहीं है।
