लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना टीम ने मिस्त्र के खिलाफ सनसनीखेज वापसी करते हुए FIFA वर्ल्ड कप 2026 के क्वार्टर-फाइनल में जगह बना ली है। अब उसके सामने स्विट्जरलैंड की चुनौती है। मिस्त्र के खिलाफ अर्जेंटीना 79वें मिनट तक 2 गोल से पिछड़ रहा था। निर्धारित समय में 11 मिनट बचे हुए थे और अर्जेंटीना के फैंस मायूस थे। उन्होंने ये मान लिया था कि उनकी फेवरेट टीम का सफर राउंड ऑफ 16 में खत्म होने वाला है।
मिस्त्र इतिहास की दहलीज पर था। पहली बार FIFA वर्ल्ड कप का नॉकआउट मुकाबला खेल रहा यह अफ्रीकी देश अब तक अर्जेंटीना पर भारी पड़ता दिख रहा था लेकिन इसके बाद कहानी बदल गई। क्रिस्टियन रोमेरो ने 79वें मिनट में अर्जेंटीना के लिए पहला गोल दाग बढ़त कम किया और फिर लियोनेल मेसी ने अपना चमत्कार दिखाते हुए 83वें मिनट में अपनी टीम को बराबरी दिला दी। स्कोर 2-2 से बराबर था और अब तक खुलकर खेल रही मिस्त्र की टीम घबराने लगी।
अर्जेंटीना ने इसका फायदा उठाया और स्टॉपेज टाइम में एंजो फर्नांडिस ने गोल दाग मिस्त्र को वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया। इस गोल से डिफेंडिंग चैंपियन टीम के फैंस जश्न में डूब गए तो वहीं मिस्त्र के प्रशंसकों की आंखें नम हो गईं। जैसे ही आखिरी सिटी बजी मिस्त्र के खिलाड़ी जमीन पर गिर गए। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि इतना बड़ा मौका उनके हाथ से कैसे निकल गया।
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मिस्त्र की टीम ने लगाए पक्षपात के आरोप
अर्जेंटीना के हाथों मिली दिल तोड़ने वाली हार के बाद मिस्त्र की टीम हताश और बेहद गुस्से में थी। एक तो उसका गोल वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) ने रद्द कर दिया था। वहीं आखिरी मिनटों में जब अर्जेंटीना ने तीसरा गोल किया, उससे पहले मिस्त्र के कप्तान मोहम्मद सलाह पर फाउल किया गया था लेकिन रेफरी ने इसे नजरअंदाज कर दिया। अगर वह फाउल माना जाता तो मिस्त्र को पेनल्टी मिल सकता था।
मिस्त्र का गोल उस समय रद्द हुआ था, जब वह 1-0 से आगे था। इस अमान्य गोल के बिल्ड-अप में मिडफील्डर मारवान अत्तिया का पैर लिसेंड्रो मार्टिनेज के पैर पर पड़ गया था, जिससे मिस्त्र की बढ़त दोगुनी नहीं हुई। मिस्त्र की बड़ी नराजगी यह भी थी कि उनके साथ हुए फाउल को नहीं माना गया और खेल जारी रखने के लिए कहा गया और अर्जेंटीना ने निर्णायग गोल कर मैच जीत लिया। मैच के बाद मिस्त्र के कोच ने कहा कि फुटबॉल की वर्ल्ड गवर्निंग बॉडी यानी FIFA चाहता है कि मेसी बाहर न हों। उन्होंने निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
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अर्जेंटीना को सपोर्ट कर रहा है FIFA?
मिस्र के कोच होसाम हसन ने कहा कि जिस तरह से घटनाएं घटीं, उससे विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अर्जेंटीना को हर लेवल पर सपोर्ट मिला। होसाम हसन ने कहा, 'मैदान के अंदर और बाहर कई ऐसी बातें हैं जिन पर सवाल उठाए जा सकते हैं। हर तरफ नकारात्मक पहलू हैं। यह सब विश्वसनीयता का सवाल है, जिस तरह से घटनाए घटीं, उससे विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। शायद वे वर्ल्ड चैंपियन टीम को टूर्नामेंट में बनाए रखना चाहते थे। शायद वे चाहते थे कि मेसी रेस में बने रहें।'
होसाम हसन ने आगे कहा, 'वर्ल्ड चैंपियन टीम को हर लेवल पर सपोर्ट मिला। ऐसा लगता है कि इस नतीजे को लेकर अर्जेंटीना की तरफ से दबाव था। हमें न तो सम्मान देखने को मिला है और न ही निष्पक्ष खेल। हमारी पेनल्टी को खारिज कर दिया गया, VAR ने इसकी जांच भी नहीं की और हमारा दूसरा गोल, पता नहीं किस कारण से, आश्चर्यजनक रूप से अमान्य करार दिया गया। हम सभी ने देखा है कि एलेक्सिस मैक एलिस्टर ने शर्ट को पीछे खींचा और VAR ने भी इसकी जांच नहीं की। सामान्य जीवन तो अनफेयर है ही लेकिन खेलों में अन्याय क्यों।'
मिस्त्र के फॉरवर्ड जीको ने भी कहा कि रेफरी का व्यवहार गलत था। उनकी टीम के साथ नाइंसाफी हुई। जीको ने कहा, 'रेफरी का व्यवहार बेहद अनुचित था। साफ तौर पर नाइंसाफी की गई। मैच की शुरुआत से ही अन्याय हो रहा था।'
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इससे पहले भी अर्जेंटीना पर लगे आरोप
इस वर्ल्ड कप में ऐसा पहली बार नहीं है, जब अर्जेंटीना टीम पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि उसे FIFA का सपोर्ट हासिल है। इससे पहले केप वर्डे के खिलाफ उसके राउंड ऑफ 32 मुकाबले में खेल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे। इस मैच में 5 लाख की आबादी वाले देश केप वर्डे ने अर्जेंटीना को नाको चने चबवा दिए थे। मेसी की टीम को उसे हराने के लिए 2 घंटे की मेहनत और ओन गोल (Own Goal) की जरूरत पड़ी थी। अर्जेंटीना की 3-2 से जीत के कहा गया कि केप वर्डे के साथ नाइंसाफी हुई थी। फैंस का मानना था कि मैच के 98वें मिनट में केप वर्डे को फ्री-किक मिलना चाहिए था लेकिन नहीं दिया गया।
इसके अलावा FIFA पर अर्जेंटीना को आसान ड्रॉ देने का आरोप लग रहा है। आलोचकों का कहना है कि सेमीफाइनल तक अर्जेंटीना की टीम किसी बड़ी टीम का सामना नहीं करेगी, यह पक्षपात नहीं है तो और क्या है!


