20 साल बाद कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर के हत्या मामले में अदालत का फैसला आ गया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल और सात अन्य लोगों को बरी कर दिया है। महाराष्ट्र के इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की जांच सीबीआई ने की थी। अपनी जांच में केंद्रीय एजेंसी ने पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल को मुख्य आरोपी माना था।

 

अदालत ने गवाहों की गवाही को संदिग्ध माना। इसके बाद सभी आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया। हत्याकांड में 128 लोगों ने अपनी गवाही दी। करीब दो दशक तक चली जांच के बाद अब भी एक सवाल उठ रहा है कि पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर को किसने मारा?

 

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 3 जून 2006 को नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में तत्कालीन विधायक पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की कार में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हाई-प्रोफाइल मामला होने के कारण मामले की जांच पुलिस के अलावा सीआईडी को सौंपी गई। पवनराजे का परिवार जांच से खुश नहीं था। उसने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। 23 अक्टूबर 2008 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को हत्याकांड की जांच सौंप दी।

2009 में हुई थी पद्मसिंह की गिरफ्तारी

सीबीआई ने 7 जून 2009 को तत्कालीन एनसीपी सांसद पद्मसिंह पाटिल को गिरफ्तार किया। उन पर हत्या की साजिश रचने और धन मुहैया कराने का आरोप लगाया। बाद में आठ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अगस्त 2009 में ही सीबीआई ने सभी आरोपियों के खिलाफ 5000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।

इन पर लगा था आरोप

पद्मसिंह पाटिल 
सतीश मंडाडे 
मोहन शुक्ला
पारसमल जैन 
दिनेश तिवारी 
महातम चौधरी उर्फ ​​पिंटू चौधरी 
कैलाश यादव 
ज्ञानेंद्र पांडे उर्फ ​​धीरेंद्र पांडे उर्फ ​​छोटे पांडे 
शशिकांत कुलकर्णी 

 

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गवाह मुकरे तो मुंबई ट्रांसफ किया गया केस

सितंबर 2009 में अलीबाग सत्र न्यायालय ने पद्मसिंह पाटिल को जमानत दे दी। दो साल बाद यानी जुलाई 2011 में सभी के खिलाफ आरोप तय हुए और मामले का ट्रायल शुरू हुआ। इस बीच कई गवाहों के मुकरे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2012 में केस को अलीबाग से मुंबई की अदालत में ट्रांसफर कर दिया। उधर, पारसमल जैन सरकारी गवाह बन गए और 2021 में अभियोजन पक्ष की तरफ से अपनी गवाही दी। पिछले साल जुलाई में अभियोजन पक्ष की गवाहों पूरी हुई। इसके बाद बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाया गया। 20 जून 2026 को अदालत ने सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया है।