अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बीच अब एक और मामला सुर्खियों में आ गया है। देश के पूर्व गृह सचिव और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी एस लक्ष्मीनारायण ने दावा किया है कि उनके परिवार की ओर से भगवान राम को भेंट की गई करीब 151 किलोग्राम वजन की स्वर्णजड़ित श्रीरामचरितमानस अब मंदिर में दिखाई नहीं दे रही है।

उनका आरोप है कि भेंट सौंपने के बाद उन्हें उसकी रसीद तक नहीं दी गई। उन्होंने कई पत्र लिखे, व्हाट्सएप संदेश भेजे और ट्रस्ट पदाधिकारियों से मुलाकात भी की, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद उन्होंने अब सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है।

राम नवमी पर मंदिर को भेंट की थी विशेष रामचरितमानस

एस लक्ष्मीनारायण के अनुसार, उनके परिवार में करीब 1500 वर्षों से श्रीरामचरितमानस की पूजा की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि उनकी मां जीवनभर 'राम-राम' लिखती रहीं और पूरा परिवार भगवान राम के प्रति गहरी आस्था रखता है। इसी भावना के तहत उन्होंने निर्णय लिया कि जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है तो भगवान राम को एक विशेष श्रीरामचरितमानस भेंट की जाए, जिससे श्रद्धालु भी उसके दर्शन कर सकें।

एस लक्ष्मीनारायण ने बताया कि 8 अप्रैल 2024, राम नवमी के दिन उन्होंने लगभग 151 किलोग्राम वजन की श्रीरामचरितमानस मंदिर को समर्पित की। उनके अनुसार इसमें करीब 800 ग्राम सोने की जड़ाई की गई थी और इसे तैयार कराने में परिवार की वर्षों की आस्था और जीवनभर की पूंजी लगी थी।

 

यह भी पढ़ें: राम मंदिर केस: गोपाल राव अयोध्या ये बाहर, SIT को ऑडिट में मिलीं गंभीर खामियां

'तीन-चार महीने बाद पता चला, रामचरितमानस नहीं दिख रही'

एस लक्ष्मीनारायण का कहना है कि भेंट देने के तीन-चार महीने बाद उनके रिश्तेदार दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे तो उन्हें मंदिर में वह श्रीरामचरितमानस दिखाई नहीं दी। इसके बाद उन्हें इसकी चिंता हुई और उन्होंने स्वयं अयोध्या जाकर जानकारी लेने का फैसला किया। एस लक्ष्मीनारायण ने बताया कि अयोध्या पहुंचने पर करीब नौ9 घंटे इंतजार करने के बाद उनकी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात हुई। 

एस लक्ष्मीनारायण के अनुसार, चंपत राय ने कहा कि उनके पास इस तरह की कई भेंट आती रहती हैं और वह सभी चीजों का प्रदर्शन नहीं कर सकते। लक्ष्मीनारायण का कहना है कि उन्होंने हाथ जोड़कर निवेदन किया कि यह उनकी पूरी जिंदगी की पूंजी है और इसे श्रद्धा से तैयार कराया गया है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने चंपत राय से कहा था कि संसद के लिए सेंगोल बनाने वाले कारीगरों ने ही इस श्रीरामचरितमानस को तैयार किया है। पहले उन्हें आश्वस्त किया गया कि इसे रामलला के पास रखा जाएगा, बाद में कहा गया कि बाहर रखा जाएगा और अंततः यह भी संभव नहीं हो पाया।

मां के गहनों का सोना लगाकर बनवाई थी रामचरितमानस'

पूर्व गृह सचिव ने कहा कि उनकी मां के गहनों का सोना गलवाकर इस श्रीरामचरितमानस पर गोल्ड वर्क कराया गया था। उनके मुताबिक यह केवल धार्मिक भेंट नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आस्था, भावनाओं और वर्षों की श्रद्धा का प्रतीक थी।

 

यह भी पढ़ें: राम मंदिर दान चोरी कांड: पानी बेचता था अविनाश, मैकेनिक है लवकुश, कैसे बने अमीर?

नृपेंद्र मिश्र और गोपाल राव से भी किया अनुरोध

लक्ष्मीनारायण ने बताया कि उन्होंने इस मामले में पूर्व IAS नृपेंद्र मिश्र से भी बात की। उनके अनुसार, नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि अब यह मामला चंपत राय देखते हैं और वे बात तो करेंगे, लेकिन किसी परिणाम की गारंटी नहीं दे सकते। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने गोपाल राव से भी अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें भी यही जवाब मिला कि इस विषय में अंतिम निर्णय चंपत राय ही ले सकते हैं।

50 मैसेज और 10-12 पत्र भेजे, फिर भी नहीं मिला जवाब'

एस लक्ष्मीनारायण का दावा है कि उन्होंने पूरे मामले में करीब 50 व्हाट्सएप संदेश और 10-12 पत्र लिखे। सभी पत्रों में उन्होंने विनम्रता से अनुरोध किया कि उनकी भेंट की गई श्रीरामचरितमानस को उचित स्थान दिया जाए, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उनका यह भी आरोप है कि आज तक उन्हें भेंट की रसीद भी उपलब्ध नहीं कराई गई।

 

यह भी पढ़ें: कौन कराता था राम मंदिर में दान की चोरी? व्हाट्सएप चैट से खुले राज

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच नया विवाद

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहले से पुलिस और एसआईटी जांच कर रही है। आठ आरोपियों की गिरफ्तारी और लगातार सामने आ रहे नए खुलासों के बीच पूर्व गृह सचिव के इन आरोपों ने पूरे प्रकरण को नया आयाम दे दिया है। इस बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए टिप्पणी की है। एस लक्ष्मीनारायण द्वारा लगाए गए आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।