संजय सिंह, पटना। बिहार में सरकारी अस्पतालों की स्थिति बदहाल है। कहीं अस्पताल है तो डॉक्टर नहीं, तो कहीं डॉक्टर है तो अस्पताल नहीं। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान विरोधी दल के नेताओं ने लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार को पूरी तरह घेरने की कोशिश की थी। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कई आंकड़ों के माध्यम से लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोली थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तब लोगों को आश्वासन दिया था कि स्वास्थ्य विभाग में सुधार के लिए इस बार बेहतर काम किया जाएगा।
अब चुनाव के बाद नीतीश कुमार ने अस्पतालों की व्यवस्था को सुधारने के लिए समृद्धि यात्रा के पहले दिन ही सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने की घोषणा कर दी थी। अब सरकार इस योजना पर आगे काम करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए नीति तैयार करने के लिए छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी जल्दी ही अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी और इसके बाद कुछ ऐलान होने की संभावना है।
अस्पतालों में होगा सुधार
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगने से अस्पताल की व्यवस्था में सुधार होगी। डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस को छोड़कर अस्पताल में ज्यादा समय देंगे। मरीजों को भी इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा। दलालों पर भी अंकुश लग जाएगा। ग्रामीण इलाकों की हालत सुधरेगी। अधिकांश डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्र के अस्पताल में काम नहीं करना चाहते हैं।
सरकारी अस्पतालों में नौकरी करते कई डॉक्टरों ने अपना प्राइवेट क्लिनिक खोल रखा है। ज्यादा कमाई के लालच में वे सरकारी अस्पताल के बदले अपने प्राइवेट क्लिनिक में समय देते हैं। कमिटी इस बात का आकलन करेगी कि डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस छोड़ने के बदले में किस तरह का प्रोत्साहन दिया जाए। इसके अलावा सैलरी, इंसेंटिव, पदोन्नति में वरीयता, आवास सुविधा, बेहतर कार्य वातावरण और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता जैसे प्रस्तावों पर विचार करेगी। इसके अलावा यह कमेटी ग्रामीण क्षेत्र में काम करनेवाले डॉक्टरों के लिए विशेष पैकेज तैयार करने पर विचार करेगी।
कौन हैं कमेटी के सदस्य?
स्वास्थ्य विभाग ने जो छह सदस्यीय कमेटी गठित किया है, उसमें से अधिकांश लोग स्वास्थ्य सेवा से ही जुड़े हैं। नरसिंह एवं रोग नियंत्रण के निदेशक प्रमुख रेखा झा और पीएमसीएच के अधीक्षक को संयुक्त रुप से अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं नालंदा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य कमेटी के सदस्य होंगे। स्वास्थ्य सेवा संघ के अध्यक्ष केके मणि महासचिव, डॉक्टर रोहित कुमार और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर विभूति नारायण सिन्हा को भी सदस्य बनाया गया है। समिति की रिपोर्ट आने पर राज्य सरकार इसका अध्ययन करेगी और फिर फैसले लेगी।
सीएम नीतीश का फैसला
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव के दौरान ही यह बताया था कि अब स्वास्थ्य सुविधा में सुधार के लिए बेहतर प्रयास किया जाएगा। उन्होंने 16 जनवरी से पूरे बिहार के लिए समृद्धि यात्रा निकाली। यात्रा के पहले दिन ही 16 जनवरी को उन्होंने डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने की घोषणा की। अब हेल्थ डिपार्टमेंट इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने में जुट गया है। यदि इस घोषणा पर अमल किया जाता है तो निश्चित तौर पर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार दिखेगा।
