बिहार की राज्य विधानसभा में पेश की गई आर्थिक समीक्षा में यह बताया है कि साल 2024-25 में दुर्घटना की वजह से 2,547 लोगों की मौत हुईं हैं, जिनमें सबसे अधिक मौतें डूबने से हुईं हैं। बिहार में होने वाले आपदाओं के कारण इन मौतों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। समीक्षा के अनुसार, वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 2,140 था। समीक्षा में बताया गया कि राज्य के दक्षिण-मध्य और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में बाढ़ और आंधी-तूफान की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं।
यहां हर साल बाढ़, सूखा और आकाशीय बिजली जैसी घटनाओं से जान-माल का भारी नुकसान होता है। हाल ही में आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़े बिहार पर मंडरा रहे खतरों के प्रति लोगों को आगाह कर रहे हैं। सरकार अब लोगों को जागरूक करने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए किस तरह की योजनाएं बना रही है।
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एक साल में प्राकृतिक आपदा से हजारों मौतें
वर्ष 2024-25 के दौरान प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं के आंकड़ों में काफी चिंताजनक बदलाव देखे गए हैं। इस अवधि में सबसे अधिक मौतें डूबने की घटनाओं से हुई, जिसमें कुल 2,039 लोगों ने अपनी जान गंवाई। वहीं, आकाशीय बिजली गिरने का कहर भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है। जहां 2023-24 में 242 लोगों की मौत हुई थी, वहीं इस साल यह संख्या बढ़कर 305 तक पहुंच गई। बिजली की चपेट में आकर मरने वाले लोगों की संख्या घटी है।
आग लगने और लू का प्रभाव भी इस बार अधिक घातक रहा। आग की घटनाओं में मरने वालों का आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 25 बढ़कर 143 हो गया है। इसी तरह, लू के कारण होने वाली मौतों में भी भारी उछाल देखा गया है, जहां पिछले साल केवल 12 लोगों की जान गई थी, वहीं इस साल यह संख्या बढ़कर 34 हो गई है।

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सरकार क्या कह रही है?
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव का कहना है कि किसी भी मुसीबत से बचने के लिए उसकी तैयारी और सही समय पर मदद पहुंचना सबसे जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार बाढ़, सूखा और बिजली गिरने जैसी आपदाओं से प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सरकार की नई पहल
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) अब पूरे राज्य में लोगों को जागरूक करने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। इस अभियान में आम लोगों को आपदाओं से बचने के तरीके सिखाए जाएंगे। स्कूलों में बच्चों को खास तौर पर ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे सावधानियों के बारे में जान सकें।
