लखनऊ। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में पहली बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय मंगलवार को सामने आए। ट्रस्ट की बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के एक दिन बाद उन्होंने रामभक्तों के नाम एक खुला पत्र जारी कर अपनी चुप्पी तोड़ी। पत्र में चंपत राय ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर वह अभी कुछ नहीं कहेंगे, लेकिन विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद हर आरोप और हर सवाल का क्रमवार जवाब देंगे।

 

चंपत राय ने कहा कि 7 जून 2026 को दानपात्र की गणना के दौरान सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद उनके खिलाफ कई तरह के आरोप लगाए गए। इसी कारण उन्होंने अब तक मौन बनाए रखा है। उनका कहना है कि अब तक केवल एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आई है, जबकि पूरी सच्चाई अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट होगी।

'प्रारंभिक रिपोर्ट सार्वजनिक, अंतिम रिपोर्ट का इंतजार'

अपने पत्र में चंपत राय ने लिखा कि 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जो अब सार्वजनिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट पहले 'परम गोपनीय' थी। अब वह अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और उसके सामने आने के बाद पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।उन्होंने दावा किया कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का तथ्यात्मक जवाब दिया जाएगा और पूरा सच रामभक्तों के सामने रखा जाएगा।

45 साल के सार्वजनिक जीवन का दिया हवाला

चंपत राय ने अपने पत्र में लिखा कि वर्ष 1991 में उन्हें संगठन की ओर से अयोध्या भेजा गया था और उनका प्रचारक जीवन 45 वर्षों का रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां उन्होंने काम किया, उनका जीवन हमेशा एक खुली किताब की तरह रहा है। उन्होंने पत्र के अंत में रामभक्तों को नमन करते हुए धैर्य बनाए रखने की अपील भी की।

 

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संतों ने कहा- इस्तीफा नैतिक जिम्मेदारी का कदम

रामनगरी के कई संतों ने चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार किए जाने को परिस्थितियों के अनुरूप उचित निर्णय बताया। संतों का कहना है कि चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा है, लेकिन इससे उन्हें दोषी नहीं माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि अंतिम निष्कर्ष एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

स्वतंत्र निगरानी समिति बनाने की मांग

संतों ने राम मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि इस समिति में अयोध्या के वरिष्ठ संतों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और व्यवस्थाओं पर धार्मिक निगरानी भी बनी रहे।संतों ने यह भी मांग की कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रामानंदाचार्य परंपरा का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

गोविंद देवगिरी की भूमिका पर भी उठे सवाल

कुछ संतों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि चढ़ावा चोरी प्रकरण में प्रबंधन स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी केवल चंपत राय तक सीमित नहीं हो सकती। संतों ने पूछा कि यदि जवाबदेही तय की जा रही है तो फिर केवल चंपत राय और अनिल मिश्रा से ही इस्तीफा क्यों लिया गया।

 

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एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में क्या निकला?

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया चढ़ावा गणना के दौरान चोरी और गबन की घटनाओं की पुष्टि की गई है। जांच में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने की घटनाएं दर्ज होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और गणना प्रक्रिया में गंभीर खामियां भी चिन्हित की गई हैं।

 

एसआईटी ने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर की संस्तुति करने के साथ ही गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, अन्य पर्यवेक्षणीय कर्मियों तथा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत विवेचना की सिफारिश की है। हालांकि एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है और अंतिम जांच अभी जारी है।

अब अंतिम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

चंपत राय के पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद अब पूरे मामले की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिक गई है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी थी और किन लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई होगी