राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज होने वाली बैठक सबसे अहम मानी जा रही है। बैठक का मुख्य एजेंडा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के इस्तीफे स्वीकार किए जाने की संभावना है। 26 जून को दोनों ने इस्तीफा दिया था, जिसकी पुष्टि 27 जून को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने की थी। बैठक में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट, दान पात्रों से प्राप्त राशि की गणना व्यवस्था, मंदिर प्रबंधन से जुड़े प्रस्ताव और वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिट पर भी चर्चा होगी।
6 जून को चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की यह पहली बैठक है। 13 जून को ट्रस्ट की मांग पर एसआईटी का गठन किया गया था। 25 जून को एफआईआर दर्ज होने के बाद आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। चढ़ावे की गणना और मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के पास होने के कारण दोनों शुरू से ही सवालों के घेरे में रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक में दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा, जिसके बाद ट्रस्ट सदस्य निर्णय लेंगे।
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चंपत राय का क्या होगा?
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने रामभक्तों के नाम जारी अपील में कहा कि चोरी कितनी हुई, कब हुई और कैसे हुई, यह पूरी तरह जांच का विषय है। इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए और सभी को एसआईटी, पुलिस और न्यायालय पर विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने घटना को अविश्वसनीय, जघन्य महापाप और रामभक्तों के हृदय को विदीर्ण करने वाला बताते हुए कहा कि वह स्वयं इस घटना से अत्यंत आहत, दुखी और लज्जित हैं।
उन्होंने कहा कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका नाम या पद नहीं देखा जाना चाहिए और उसे न्यायालय से कठोर दंड मिलना चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट के सभी न्यासियों से भविष्य में ऐसी आधुनिक और अभेद व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया, जिसमें दान की गणना पूरी तरह पारदर्शी हो।
कोषाध्यक्ष ने किया इनकार
स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि वह लगभग हर महीने या डेढ़ महीने में ट्रस्ट के कार्य से अयोध्या आते हैं, लेकिन आज तक उन्होंने अपने हवाई यात्रा या अन्य प्रवास का एक भी रुपया ट्रस्ट से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि हुंडी में आने वाले दान की गणना जिस केंद्र पर होती है, उससे उनका कभी कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा। उनका निवास पुणे में है और चढ़ावा गिनने की व्यवस्था स्थानीय न्यासी देखते रहे हैं। उन्होंने बताया कि दान गणना की मानक प्रक्रिया स्थानीय ट्रस्ट पदाधिकारियों और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से तैयार की गई थी और उन्हें यह प्रक्रिया पिछले महीने पहली बार दिखाई गई।
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ऑडिट का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित, नकद चंदा लेने से किया इनकार
कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट के कोष में जमा राशि का शुरू से अब तक पूरे आय-व्यय का ऑडिट किया हुआ लेखा सुरक्षित है और अधिकृत व्यक्ति कभी भी इसकी जांच कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय के चार्टर्ड अकाउंटेंट हर महीने अयोध्या आकर खातों की जांच करते हैं और आवश्यक मार्गदर्शन भी देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यासी बनने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत रूप से किसी से भी मंदिर के लिए नगद दान स्वीकार नहीं किया। केवल दो अपवाद रहे—उनकी दिवंगत बड़ी बहन की ओर से 11 हजार रुपये और पुणे में एक श्रद्धालु की ओर से एक किलो चांदी की ईंट, जिसकी विधिवत रसीद जारी की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर का पूरा भुगतान बैंक के माध्यम से होता है। वह बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं, उनके पास कोई चेकबुक नहीं है और न ही किसी प्रकार का नकद भुगतान किया जाता है।


