पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार माने जाने वाले सुवेंदु अधिकारी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान या चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि उनके एक बेहद करीबी सहयोगी की हत्या है। बुधवार, 6 मई की रात उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम में सुवेंदु के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की बीच सड़क गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह पहली बार नहीं है जब सुवेंदु अधिकारी के किसी करीबी की इस तरह मौत हुई हो। पिछले 11 सालों में उनके करीबियों की संदिग्ध हालात में मौत का यह तीसरा मामला बताया जा रहा है।

 

चंद्रनाथ रथ साल 2021 से सुवेंदु अधिकारी के साथ जुड़े थे और उनके चुनावी प्रबंधन से लेकर महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभालते थे। बुधवार रात जब वह अपनी कार में दो अन्य लोगों के साथ जा रहे थे, तभी घात लगाए हमलावरों ने उन पर गोलियां बरसा दीं। अस्पताल ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ दिया। सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना को 'ठंडे दिमाग से की गई सुनियोजित हत्या' करार दिया है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि सुवेंदु के सहयोगियों की अप्राकृतिक मौत का यह तीसरा बड़ा मामला है।

 

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PA से लेकर बॉडीगार्ड तक गंवाई जान

सुवेंदु अधिकारी के करीबियों की मौत का सिलसिला साल 2013 से शुरू हुआ था। उस समय सुवेंदु TMC के सांसद थे और उनके तत्कालीन निजी सहायक प्रदीप झा की लाश कोलकाता के स्ट्रैंड रोड पर फुटपाथ पर मिली थी। 3 अगस्त 2013 की सुबह पुलिस को प्रदीप बेहोश मिले थे, जिन्हें बाद में मृत घोषित कर दिया गया। हालांकि उस समय पुलिस रिपोर्ट में उनके अत्यधिक शराब पीने और सांस की नली में खाना फंसने की बात कही गई थी लेकिन एक प्रभावशाली सांसद के PA की इस तरह सड़क किनारे मौत ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए थे।

 

अक्टूबर 2018 में एक और चौंकाने वाली घटना घटी, जब सुवेंदु अधिकारी के निजी बॉडीगार्ड शुभब्रत चक्रवर्ती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया गया कि शुभब्रत ने पूर्व मेदिनीपुर स्थित पुलिस बैरक में अपनी ही सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी। उस समय शुभेंदु ममता सरकार में परिवहन मंत्री थे। एक प्रोफेशनल बॉडीगार्ड द्वारा अचानक आत्महत्या जैसा कदम उठाना उस समय भी राज्य की राजनीति में चर्चा और विवाद का केंद्र बना था।