दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 1511 कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने और उनमें रह रहे लोगों को मालिकाना हक के सर्टिफिकेट देने के इस फैसले से लगभग 50 लाख लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही, लंबे समय से चली आ रही अनधिकृत कॉलोनियों की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। दिल्ली सरकार का कहना है कि इससे योजनाबद्ध विकास के प्लान बनाने में मदद मिलेगी और लोग अपनी जमीन या घर पर अब लोन भी ले चुके हैं। यह प्रक्रिया इसी महीने शुरू हो जाएगी और ऑनलाइन आवेदन करके दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लोग अपने घर का सर्टिफिकेट हासिल कर सकेंगे।
दिल्ली की हजारों अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लाखों परिवारों के सामने समस्या यह है कि उन्होंने जो घर बना रखे हैं, वे कानूनी रूप से वैध नहीं हैं। इसी समस्या को हल करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री अनअथराइज्ड दिल्ली आवास अधिकार योजना (PM-UDAY) शुरू की थी लेकिन इस योजना के तहत लोगों को उनके घर का मालिकाना हक देने की शुरुआत की थी। इस योजना को रफ्तार न मिलने की बड़ी वजह यह थी कि आवेदन करने वाले लोगों को दिल्ली नगर निगम (MCD) से अपने इलाके का लेआउट प्लान लेना था। कच्ची कॉलोनियों को लेआउट प्लान ही नहीं मिल पाता था इस वजह से बहुत कम ही लोगों को इसके तहत मालिकाना हक मिला।
अब क्या बदल गया है?
केंद्र सरकार के आवासीय और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने दिल्ली की 1511 अवैध कॉलोनियों को 'As is where is basis' पर पक्का करने का फैसला लिया है। 24 अप्रैल से शुरू हो रही इस योजना के तहत वह प्रक्रिया आसान कर दी गई है जिसके तहत लोग अपने घर या दुकान से जुड़ा कागज हासिल कर सकेंगे। अब इस तरह के लोगों को जो लैंड यूज मिलेगा वह 'रेजिडेंशियल' टाइप का होगा। पहले लेआउट प्लान अनिवार्य था लेकिन अब बिना लेआउट प्लान के भी आवेदन किया जा सकेगा। पहले यह काम पूरी तरह से दिल्ली विकास प्राधिकरण के पास था लेकिन अब इसे दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग को सौंप दिया गया है। सर्टिफिकेट जारी करने के काम दिल्ली नगर निगम के पास ही रहेगा।
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इसके बारे में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है, 'दिल्ली के योजनाबद्ध विकास की ओर यह पहला कदम है।' केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यह भी बताया है कि यह योजना पहले से बने घरों पर लागू है और नए घर बनाने वालों को दिल्ली नगर निगम से अनुमति लेनी होगी।
आगे क्या-क्या होगा?
24 अप्रैल से दिल्ली नगर निगम के स्वगम पोर्टल पर आवेदन शुरू होंगे। इन 1511 कच्ची कॉलोनियों के लोग इस पोर्टल के जरिए ही लोग आवेदन कर सकेंगे। लोगों को अपनी बिल्डिंग का एक बिल्डिंग प्लान बनवाकर ही आवेदन करना होगा। यह बिल्डिंग प्लान MCD की ओर से अधिकृत 700 में से किसी भी आर्किटेक्ट से बनवाया जा सकेगा। यही आर्किटेक्ट आपका प्लान अपलोड कर देंगे और सबकुछ सही पाए जाने पर MCD की ओर से रेगुलराइजेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा।
यह भी बताया गया है कि अगर आपका घर सरकारी जमीन पर बना है तो दिल्ली का राजस्व विभाग आपको 'कन्वेएंस डीड' देगा और अगर आपका घर प्राइवेट जमीन पर है तो 'ऑथराइजेशन स्लिप' दे दी जाएगी। MoHUA की अडिशनल सेक्रेटरी डी तारा ने बताया है कि यह सर्टिफिकेट मिल जाने के बाद दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों के लोग भी अपनी जमीन या घर के बदले लोन ले सकेंगे। यह ध्यान देना जरूरी है कि इस योजना का लाभ 20 वर्ग मीटर से छोटे प्लाट पर बनी इमारतों पर ही लागू होगा।
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पहले जो सर्वे DDA करता था, वह सर्वे अब दिल्ली के राजस्व विभाग के पटवारी और नायब तहसीलदार करेंगे। ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी और नगर निगम नए निर्माण पर नजर रखेगा। 7 दिन में GIS सर्वे की रिपोर्ट आएगी, 15 दिन में डेफिसिएंसी मेमो और 45 दिन में कन्वेएंस डीड मिल जाएगी।
कौन नहीं करा पाएगा रजिस्ट्रेशन?
इस योजना के तहत वे लोग कतई लाभ नहीं ले पाएंगे जो प्रतिबंधित क्षेत्रों में बसे हैं या जिनके घर प्रतिबंधित क्षेत्रों में हैं। उदाहरण के लिए यमुना के डूब क्षेत्र में बने किसी भी घर के लिए यह सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा। वन क्षेत्र, रिज क्षेत्र, हेरिटेज जोन, सड़क पर अतिक्रमण करके बने घर या हाईटेंशन लाइन के नीचे बने घर और 69 एफ्लुएंट कॉलोनियों के लिए इस योजना के तहत आवेदन नहीं कर सकेंगे।
हाल ही में सरकार ने संसद में बताया था कि 2 फरवरी तक सिर्फ 22,228 लोगों को कन्वेएंस डीड और 18462 लोगों को ऑथराइजेशन स्लिप दी गई है।
