बिहार अपने अजब-गजब कामों के लिए जाना जाता है। राज्य में कभी पुल गायब हो जाते हैं तो कभी तालाब। केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि बिहार से 8,937 पानी के स्रोत जमीन से ही गायब हो गए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में कागजों से पानी के स्रोतों का गायब होना राज्य में जमीन कब्जा और भ्रष्टाचार के एक और लहर के तौर पर देखा जा रहा है। 

 

दरअसल, पिछले साल जल शक्ति मंत्रालय ने बिहार में मौजूद पानी के स्रोतों की जनगणना करवाई थी। इसी जनगणना में सामने आया है कि 2018-19 में बिहार में 45,793 पानी के स्रोत मौजूद थे, मगर वह घटकर अब 36,856 रह गए हैं। इसका मतलब है कि तकरीबन 9,000 पानी के स्रोत गायब हो गए हैं।

 

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जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट

जल शक्ति मंत्रालय ने बिहार के अलावा असम, दिल्ली, लद्दाख और सिक्किम के तालाबों की जनगणना करवाई थी। इस जनगणना के मुताबिक, इनमें से 45 फीसदी पानी के स्रोत बिहार के हैं। हालांकि बिहार के रेवेन्यू और लैंड रिफॉर्म्स डिपार्टमेंट के पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि यह पानी के स्रोत कहां गए। साथ ही जो पानी के स्रोत गायब हैं उनमें से कितने पानी के स्रोतों पर कब्जा हुआ है?

बिहार के ग्रामीण इलाकों में स्रोत

जनगणना से पता चलता है कि 85 फीसदी पानी के स्रोत बिहार के ग्रामीण इलाकों में हैं। इनमें से लगभग 91 फीसदी तालाब हैं, जबकि बाकी में झीलें, टैंक, जलाशय, चेक डैम और परकोलेशन डैम हैं। बिहार सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'हम वॉटर बॉडीज जनगणना के नतीजों को देख रहे हैं और कब्जा मुक्त सार्वजनिक तालाबों पर एक अपडेटेड रिपोर्ट मंगवाएंगे।'

 

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आंकड़े क्या कहते हैं?

जनगणना में सामने आया है कि 2018-19 में बिहार में 35,027 तालाबों में से सिर्फ 33,618 ही बचे हैं। इसका मतलब है कि 1,409 तालाब पूरी तरह से गायब हो गए हैं। इसी तरह से टैंकों की संख्या 4,221 से घटकर 859, झीलों की संख्या 2,693 से घटकर 258 और जलाशयों की संख्या 2,156 से घटकर 315 हो गई है।

 

राज्य के पानी के स्रोतों पर लैंड माफिया कब्जा करने रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन पानी के स्रतों पर भी इन्हीं लैंड माफियाओं ने कब्जा किया है।