संजय सिंह, पटना: बिहार के किशनगंज के पूर्व SDPO गौतम कुमार इन दिनों सिर्फ भ्रष्टाचार के एक मामले की वजह से ही नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र पर उठ रहे बड़े सवालों के कारण चर्चा में हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले में हुई छापेमारी के बाद एक ऐसी कहानी सामने आ रही है, जिसने सबको चौंका दिया है। 80 करोड़ की गुप्त संपत्ति, महिला मित्रों और नौकरानी के नाम पर निवेश यह मामला साधारण भ्रष्टाचार से कहीं बड़ा नजर आ रहा है।

 

जांच एजेंसी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई के बाद सरकार ने 7 अप्रैल को गौतम कुमार को सस्पेंड कर दिया है लेकिन सवाल अब पूरी पोस्टिंग व्यवस्था पर उठ रहे हैं। आखिर ऐसा कैसे हुआ कि कोई अधिकारी अपने 20-22 साल के करियर में लगभग एक ही इलाके में जमा रहा? क्या यह सब बिना किसी बड़े हाथ के संभव था?

 

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सीमांचल में ही बीता पूरा करियर

सूत्रों के अनुसार, 1994 में दारोगा के रूप में भर्ती हुए गौतम कुमार ने तरक्की पाकर इंस्पेक्टर और फिर DSP का पद पाया। हैरानी की बात यह है कि पटना और बगहा में कुछ महीनों को छोड़ दें तो उनका लगभग पूरा करियर किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया जैसे जिलों में ही बीता। इसी 'सीमांचल प्रेम' ने अब शक की सुई घुमा दी है। पुलिस मुख्यालय अब पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार और अररिया में तैनात उन सभी अफसरों की कुंडली खंगाल रहा है, जो लंबे समय से यहां जमे हुए हैं। फिलहाल 15 से ज्यादा अधिकारी रडार पर हैं।

करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

जांच एजेंसी ने 31 मार्च 2026 को गौतम कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया था। छापेमारी में मिली संपत्तियों ने अफसरों को भी हैरान कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पास करीब 80 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति होने का अनुमान है। इसमें सिलीगुड़ी में चाय का बागान, नोएडा में फ्लैट और पटना में एक बड़े अस्पताल के निर्माण के कागजात मिले हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन संपत्तियों का बड़ा हिस्सा उन्होंने अपनी पत्नी, सास, महिला मित्रों और यहां तक कि घर में काम करने वाली सहायिका के नाम पर खरीदा था। पूर्णिया में उनकी एक कथित करीबी महिला मित्र के घर से 60 लाख के जेवर और जमीन के ढेर सारे कागज बरामद हुए हैं।

 

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इस पूरे मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सवाल यह है कि क्या ट्रांसफर-पोस्टिंग के नियमों की अनदेखी जानबूझकर की गई? क्या किसी बड़े नेता या अधिकारी का उन्हें संरक्षण प्राप्त था? फिलहाल EOU की पूछताछ जारी है और 10 अप्रैल को उन्हें फिर से बुलाया गया है। जानकारों का मानना है कि अगर जांच की परतें और खुलीं तो पुलिस महकमे के कई और बड़े चेहरों से नकाब उतर सकता है।