बिहार से सटे उत्तर प्रदेश के छह जिलों में जमकर शराब पी गई। यहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समृद्ध जिलों से अधिक शराब बिकी और टैक्स कलेक्शन ने सभी को हैरत में डाल दिया। 2016 में बिहार में पूरी तरह से शराबबंदी के बाद यूपी के गाजीपुर, चंदौली, कुशीनगर, देवरिया, बलिया और सोनभद्र में शराब बिक्री में इजाफा देखने को मिल रहा है।
पूर्वांचल के दो पिछड़े जिले कुशीनगर और देवरिया के लोगों की औसत आय मेरठ, बरेली और अलीगढ़ से लगभग आधी है। मगर यहां बरेली, अलीगढ़, मेरठ, मथुरा और मुरादाबाद से अधिक शराब पी जा रही है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की मुताबिक बिहार से सटे यह जिले 2025-26 में सबसे अधिक टैक्स कलेक्शन करने वाले जिले बनकर उभरे हैं। पांच जिलों ने इस वर्ष निर्धारित राजस्व लक्ष्य का 90 फीसद से अधिक कलेक्ट किया है। बलिया और सोनभद्र जिले ने 100 फीसद से अधिक का कलेक्शन किया है। प्रदेश के दो और जिलों ने 100 प्रतिशत से अधिक राजस्व संग्रह किया है।
यह भी पढ़ें: 275 करोड़ का पैकेज, 30 हजार छंटनी करने वाली कंपनी को मिली नई CFO
कैसे यूपी से बिहार तक हो रही तस्करी?
उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग ने सभी 75 जिलों की मांग और आपूर्ति की समीक्षा की। इसमें पता चला कि बिहार के लोग सीमा पार करके शराब पीने आ रहे हैं। यहां तक की बोतलों में भरकर तस्करी की जा रही है। यूपी और बिहार के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर है। गाड़ियों से नियमित आवाजाही है। ऐसे में तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाना आसान नहीं है। वहीं इसके अलावा गंडक, घाघरा और गंगा व उनकी सहायक नदियां के माध्यम से कुशीनगर, देवरिया, बलिया, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सिवान और बक्सर के आवागमन है।
यह भी पढ़ें: 'तुम्हारी रोजी-रोटी हमसे चलती है', गंगा किनारे शराब पीकर पुलिस से भिड़ गई महिला
अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि खुदरा बिक्री की सीमा से जुड़े नियम भी बेहद लचीले हैं। यूपी में कोई व्यक्ति ठेके से 1 लीटर तक देसी शराब, 4.5 लीटर तक घरेलू और विदेशी शराब व 6 लीटर तक बीयर ले जाने की इजाजत है।
