महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) यूनिट में कथितत धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर चल रही जांच में अब कंपनी ने अपना पक्ष रखा है। पुलिस जांच में कंपनी ने बताया कि उन्हें अपने इंटरनल शिकायत सिस्टम के जरिए इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली थी। आईटी कंपनी ने शुक्रवार को इस मामले पर यह बयान दिया है।
टीसीएस ने अपने बयान में कहा कि शुरुआती जांच के अनुसार, कंपनी को वैसी कोई शिकायत नहीं मिली है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है। इसका साफ मतलब है कि कंपनी एक्शन ना लेने के आरोपों को यह कह कर खारिज कर रही है कि उन्हें शिकायत ही नहीं मिली थी।
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पॉश के तहत शिकयात ना मिलने का दावा
इस मामले में विवाद बढ़ने और आलोचना का सामना करने के बाद कंपनी ने बयान जारी किया है। बयान में कहा कि शुरुआती इंटरनल जांच में कंपनी ने नासिक यूनिट से जुड़े सिस्टम और डॉक्यूमेंट्स की जांच की है, जिसमें यह सामने आया है कि ना तो कंपनी के एथिस्ल चैनल और ना ही यौन उत्पीड़न रौकथाम (पॉश) के तहत कोई शिकायत दर्ज करवाई गई थी।
जांच के लिए बनाई कमेटी
कंपनी ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए एक ओवरसाइट कमेटी का गठन करने की घोषणा की है। इस कमेटी की अध्यक्षता बोर्ड के डायरेक्टर और फाइनेंस सेक्टर के एक्सपर्ट केके मिस्त्री करेंगे। इंटरनल जांच का नेृतृत्व टीसीएस की चीफ ऑपरेटिंग ऑफइसर आर्थी सुब्रमण्यम कर रही हैं, जिसकी रिपोर्ट ओवरसाइट कमेटी के सामने पेश की जाएगी। कंपनी ने यह कदम उठाकर संदेश देने की कोशिश की है कि वह इस मामले को लेकर गंभीर है।
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निदा खान पर क्यो बोली कंपनी?
टीसीएस की नासिक यूनिट में हुए इस विवाद का मास्टरमाइंड निदा खान को माना जा रहा है। पीड़िताओं ने आरोप लगाया है कि HR निदा खान से उत्पीड़न की कई बार शिकायतें करने के बावजूद भी उसने कोई कार्रवाई नहीं की। मामले की जांच कर रही एसआईटी ने निदा को धर्म परिवर्तन के पीछे का मास्टरमाइंड बताया है। कंपनी ने निदा खान को लेकर कहा कि निदा खान एचआर मैनेजर नहीं है। वह एक प्रोसेस एसोसिएट है और उसने कभी कोई नेतृत्व वाली भूमिका नहीं निभाई है।
