बिहार में सम्राट चौधरी की अगुवाई में बनी नई सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार गुरुवार यानी 7 मई को हो गया। इस मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे ज्यादा बीजेपी के विधायक मंत्री बने हैं, जिसकी वजह से वह राज्य में पहली बार बड़े भाई की भूमिका में आ गई है। जेडीयू कोटे से 13 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी से दो और एक उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से मंत्री बने हैं।

 

इस मंत्रिमंडल विस्तार में भले ही बीजेपी के सबसे ज्यादा मंत्री बने हैं लेकिन चर्चा पूर्व सीएम नीतीश कुमार की पार्टी के बने नए मंत्रियों की हो रही है। इसके पीछे कारण है नीतीश कुमार का अति पिछड़ा फॉर्मूला (EBC)। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल के विस्तार के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सांसद नीतीश कुमार दोनों मौजूद रहे। 

 

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सबसे ज्यादा नौ मंत्री EBC वर्ग के मंत्री

इस मंत्रिमंडल विस्तार में राज्य के सामाजिक और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया। शपथ लेने वाले मंत्रियों में से सात मंत्री अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से जबकि सर्वाधिक नौ मंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) से शामिल किए गए हैं।

 

 

 

अगड़ी जातियों के कौन मंत्री?

इसके अलावा दो ब्राह्मण, दो भूमिहार और तीन राजपूत समुदाय से मंत्री बनाए गए हैं। वहीं सात मंत्री दलित समाज से हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) कोटे से एक राजपूत और एक दलित नेता को मंत्री बनाया गया है।

 

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उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) से एक ओबीसी नेता को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) से एक दलित नेता को मंत्री बनाया गया है।

तीन मुख्यमंत्रियों के बेटे बने मंत्री

मंत्रिमंडल में जेडीयू कोटे से एकमात्र मुस्लिम मंत्री जमा खान को बनाया गया है। नए मंत्रिमंडल की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि इसमें तीन ऐसे चेहरे शामिल हैं, जिनके पिता बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। संतोष कुमार सुमन के पिता जीतन राम मांझी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं।

 

वहीं नीतीश मिश्रा के पिता जगन्नाथ मिश्रा तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस सूची में निशांत कुमार का नाम भी शामिल है, जिनके पिता नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहे हैं। बता दें कि 15 अप्रैल को जब सम्राट चौधरी ने शपथ ली थी तब उनके साथ दो उपमुख्यमंत्रियों विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को भी शपथ दिलाई गई थी।