बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन का माहौल काफी गरमा गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्षी विधायकों के बीत तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मुख्यमंत्री सदन में हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों को कड़ी चेतावनी दी और अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्हें मर्यादा में रहने की सलाह दी।

 

जब विपक्षी सदस्य सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विपक्ष का यह व्यवहार बिलकुल गलत है। नीतीश कुमार ने विपक्षी सदस्यों को उनकी घटती संख्या की याद दिलाते हुए कहा, 'बेकार की बातें मत कीजिए। हमारे 202 विधायक हैं, जबकि आपकी संख्या कितनी कम रह गई है।' उन्होंने विपक्ष को शांति से बैठने की हिदायत देते हुए कहा कि वह हमेशा सबकी बातें सुनते हैं लेकिन इस तरह का हंगामा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विकास कार्यों का भी जिक्र

विपक्ष के शोर-शराबे के बीच मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य के लिए जितना काम किया है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। कानून-व्यवस्था पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि एक समय था जब लोग शाम के बाद घर से निकलने में डरते थे लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या उनके कार्यकाल में कोई ठोस काम हुआ था?

 

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चौकीदार और दफादारों पर लाठीचार्ज का मुद्दा

सदन में हंगामे की मुख्य वजह सोमवार को पटना में चौकीदारों और ग्राम प्रहरियों पर हुआ कथित लाठीचार्ज था। विपक्षी दल, विशेषकर राजद विधायक कुमार सर्वजात ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार को घेरा। विपक्ष का आरोप है कि अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रहरियों पर पुलिस ने बर्बरता दिखाई। विवाद की जड़ वह नया नियम है जिसके तहत ब्रिटिश काल से चली आ रही 'वंशानुगत नियुक्ति' यानी परिवार के सदस्य को ही नौकरी मिलने की परंपरा को बदला जा रहा है।

 

विपक्ष के आरोपों पर जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सब को है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक जीवन में बाधा डालने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। उन्होंने विपक्ष पर 'मगरमच्छ के आंसू' बहाने का आरोप लगाया और कहा कि नीतीश सरकार ने चौकीदारों के कल्याण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।

 

हालांकि, दिलचस्प बात यह रही कि सत्ता पक्ष के सहयोगी दल (चिराग पासवान की पार्टी) के नेता राजू तिवारी ने पुरानी नियुक्ति प्रक्रिया को ही जारी रखने का समर्थन किया।

 

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सरकार के आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला

मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार चौकीदारों और दफादारों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेगी और उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद विपक्षी सदस्य शांत हुए और प्रश्नकाल की कार्यवाही सुचारू रूप से आगे बढ़ सकी।