बिहार सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा निर्णय लिया है, जिसके तहत कोई भी सार्वजनिक जगहों पर अश्लील, द्वि-अर्थी , जातिसूचक गानों को नहीं बजा सकता है। सरकार ने ऐसे  गानों के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का कहना है कि इन द्वि-अर्थी गानों की वजह से समाज में कटुता और वैमनस्य बढ़ रहा है।

 

सरकार आदेश में कहा गया है कि सार्वजनिक जगहों, आयोजनों, बाजारों, वाहनों, विवाद समारोहों और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अश्लील द्वि-अर्थी और जातिसूचक भावनाओं को भड़काने वाले गानों पर खुलेआम बजाए जाने से आपसी भाईचारा खत्म हो रहा है।

 

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'आम लोग असहज महसूस करते हैं'

बिहार के गृह विभाग की तरफ से इस संबंध में एक पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है- 'इन गानों के प्रसारण से समाज में आम लोग असहज महसूस करते हैं। खासकर महिलाओं एवं बच्चों के प्रति नाकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से सामाजिक और सांस्कृतिक माहौल गंदा हो रहा है।'

 

 

 

संस्कृति और लोक भाषाओं को बनाए रखना जरूरी

सरकार का कहना है कि बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा एवं लोक भाषाओं की गरिमा को बनाए रखने बहुत जरूरी है। अश्लील एवं द्वि-अर्थी गाने न केवल सामाजिक मूल्यों के खिलाफ हैं बल्कि सार्वजनिक शिष्टाचार और कानून व्यवस्था के नजरिए से भी ठीक नहीं है।

 

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इसमें कहा गया है कि यह एक गंभीर और ज्वलंत सामाजिक समस्या है, जो महिलाओं, बच्चों और पूरे समाज को बुकी तरह से दुष्प्रभावित कर रहा है। बता दें कि भोजपुरी गानों पर अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि यह गाने बहुत ही अश्लील होते हैं, जिन्हें हम अपने परिवार के साथ नहीं सुन सकते।