बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने अपने बयानों पर मचे बवाल के बीच कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में पूछा है कि उन्होंने ऐसी कौन सी गलती या गुनाह किया है, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी पड़े। उनका कहना है कि वह किसी से नहीं डरते हैं। वह देश की बेटियों के सम्मान के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं और अपनी बात पर पूरी मजबूती के साथ कायम हैं।
पप्पू यादव ने चुनौती देते हुए कहा कि क्या अपनी बेटियों और महिलाओं के अधिकारों के लिए बोलना कोई अपराध है? उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी नेता या राजनीतिक संस्था से माफी नहीं मांगेंगे। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि अगर उनके शब्दों से किसी मां-बहन के दिल को सच में ठेस पहुंची है, तो वह उनके सामने 100 करोड़ बार झुकने को तैयार हैं। साथ में यह भी कहा कि वह विरोध करने वाले नेताओं के सामने वे कभी नहीं झुकेंगे।
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नेताओं पर शोषण के आरोप
सांसद ने अपने उस पुराने बयान को फिर से दोहराया कि राजनीति में पुरुष प्रधान सोच हावी है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं का शोषण किए बिना उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि कई बड़े नेताओं पर यौन शोषण के केस और चार्जशीट दर्ज हैं। उनके मुताबिक राजनेता महिलाओं को सिर्फ एक वस्तु की तरह इस्तेमाल करते हैं और वे इसी गलत व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं।
पप्पू यादव ने एक बड़ा दावा किया कि उन्होंने पहले भी सदन में यह बात कही है कि करीब 70 से 80 प्रतिशत नेता अपने फोन पर पोर्न देखते हैं। उन्होंने खुला चैलेंज दिया कि सभी नेताओं के मोबाइल फोन की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उनके खुद के मोबाइल में ऐसी चीज मिलती है, तो वह किसी भी जांच या सजा का सामना करने के लिए तैयार हैं।
एपस्टीन केस का जिक्र
दुनिया भर में मशहूर 'एपस्टीन केस' का हवाला देते हुए पप्पू यादव ने कहा कि रसूखदार लोग क्या कर रहे हैं, यह सबको पता है। उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाया कि बड़े राजनेता, अधिकारी और अमीर लोग मिलकर 6 से 12 साल की मासूम बच्चियों तक का शारीरिक शोषण करते हैं। उन्होंने इसे एक कड़वी सच्चाई बताया और कहा कि सत्ता के गलियारों में मासूमों के साथ होने वाले इस गलत व्यवहार को एक 'दावत' की तरह देखा जाता है।
बिहार राज्य आयोग द्वारा नोटिस भेजे जाने पर पप्पू यादव ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि जो खुद कांच के घरों में रहते हैं, वे दूसरों पर पत्थर न फेंके। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ने महिलाओं के हक के लिए पुरुष नेताओं की गंदगी को उजागर कर रहे हैं तो महिला आयोग को उनसे क्या परेशानी है? उन्होंने आयोग के काम करने के तरीके पर भी सवाल खड़े किए।
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उन्होंने महिला आरक्षण बिल को सिर्फ एक दिखावा करार दिया। उनका कहना है कि सिर्फ कानून बना देने से कुछ नहीं बदलेगा। उन्होंने फिर से अपनी पुरानी बात याद दिलाई कि 90 प्रतिशत महिलाओं को नेताओं के कमरों के चक्कर काटे बिना राजनीति नसीब नहीं होती। उनका मानना है कि जब तक नेताओं की नीयत साफ नहीं होगी, तब तक महिलाओं की स्थिति में कई सुधार नहीं आएगा।
