भारतीय जनता पार्टी लगतार पंजाब में अपना सियासी कद बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रही है। बीजेपी नेता लगातार आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साध रहे हैं और अब बीजेपी ने एक ऐसे मुद्दे को धार देने का मन बना लिया है जो AAP सरकार के गले की फांस बना हुआ है। बीजेपी ने पंजाब में 3 लाख से ज्यादा कर्मचारियों और 4 लाख से ज्यादा पेंशनर्स को डीए जारी करने की मांग कर दी है। 

 

बीजेपी के पंजाब अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने AAP सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए लगातार नए-नए राजनीतिक नैरेटिव तैयार कर रही है लेकिन बीजेपी ऐसा नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि पंजाब के 3 लाख से ज्यादा कर्मचारी और 4 लाख पेंशनर महंगाई भत्ते (DA) की किस्तों और बकाया राशि का इंतजार कर रहे हैं।

 

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पंजाब सरकार को घेरा

 सुनील जाखड़ ने कहा, 'हाईकोर्ट ने सरकार को 30 जून तक कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए की किस्तों और बकाया के रूप में 15 हजार करोड़ रुपये जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सरकार दोबारा अदालत पहुंच गई है।' उन्होंने आगे कहा कि भगवंत मान सरकार ने कहा है कि राज्य सरकार डीए बढ़ाने के लिए बाध्य नहीं है।

बंगाल की तरह पंजाब में होगा खेला!

सुनील जाखड़ ने मीडिया से बात करते हुए पश्चिम बंगाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने बीजेपी के लिए इसलिए वोट किया क्योंकि वहां कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो चुकी थी और कर्मचारियों को डीए भी नहीं मिल रहा था। सुनील जाखड़ ने कहा कि पंजाब में भी अब पश्चिम बंगाल जैसे हालात बनते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों और पेंशनर्स को भरोसा दिलाया कि बीजेपी की सरकार बनने पर डीए का भुगतान किया जाएगा और कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाएगी। 

कितना अहम है डीए का मुद्दा?

पंजाब में मौजूदा समय में मंहगाई भत्ता एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है। पंजाब के सरकारी दफ्तरों से लेकर चंडीगढ़ में स्थित हाई कोर्ट तक इस मुद्दे की चर्चा हो रही है। पंजाब सरकार के 3 लाख से ज्यादा कर्मचारी और 4 लाख से ज्यादा पेंशनर्स से यह मुद्दा सीधे तौर पर जुड़ा है। यानी करीब 6 लाख परिवारों को यह मुद्दा प्रभावित कर रहा है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को डीए का बयाना चुकाने का निर्देश दिया है लेकिन सरकार अभी इस स्थिति में नजर नहीं आ रही है कि डीए का भुगतान कर सके। इसके लिए सरकार को हजारों करोड़ का फंड चाहिए। 

 

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बीजेपी उठाएगी मुद्दा

अब पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार और सीएम भगवंत मान इस मुद्दा पर फंसते हुए नजर आ रहे हैं। सरकार बनने से पहले उन्होंने कर्मचारियों से कई वादे किए थे जिसका फायदा उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में भी मिला था लेकिन अब कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग सरकार से नाराज है। ऐसे में बीजेपी पश्चिम बंगाल की तरह ही पंजाब में भी डीए का मुद्दा उठाकर राजनीतिक जमीन तलाश रही है। बीजेपी इस मुद्दे के जरिए आम लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है और इसका लाभ पार्टी को आगामी चुनावों में हो सकता है।