राम मंदिर चढ़ावा कांड की जांच में अब ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मामला उजागर होने से पहले प्रतिदिन करीब 6 से 8 लाख रुपये की दानराशि में कथित अनियमितता होने की आशंका है। जांच एजेंसियां इस निष्कर्ष पर इसलिए पहुंची हैं क्योंकि प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट के बैंक खातों में जमा होने वाली दानराशि में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही यह दावा भी सामने आया है कि फरवरी में ही कथित गड़बड़ी की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच गई थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सूत्रों के मुताबिक, घटना सामने आने से पहले राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खातों में प्रतिदिन औसतन 16 से 18 लाख रुपये जमा हो रहे थे। वहीं, मामला सामने आने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया। इसी अंतर के आधार पर SIT इस बात की जांच कर रही है कि कहीं पहले प्रतिदिन 6 से 8 लाख रुपये की दानराशि में कथित गड़बड़ी तो नहीं हो रही थी। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
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फरवरी में मिली थी शिकायत, कार्रवाई नहीं होने का दावा
सूत्रों के अनुसार, फरवरी में कैश काउंटिंग टीम के एक सदस्य ने इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव को कथित गड़बड़ी की जानकारी दी थी। आरोप है कि तत्काल कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने कथित रूप से कहा, 'प्रभु देख रहे हैं, कौन सा हमारे-आपके घर से जा रहा है।' इसके बाद भी व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। अब यही पूरा घटनाक्रम एसआईटी की जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
चोरी कांड के बाद भी हर दिन आ रहे लाखों भक्त
चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। मंदिर परिसर के दान काउंटरों पर नकद और यूपीआई के माध्यम से लगातार दान किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, एक दान काउंटर पर प्रतिदिन 60 हजार से एक लाख रुपये तक दान आता है, जबकि विशेष अवसरों पर यह राशि दो लाख रुपये तक पहुंच जाती है।
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सीसीटीवी, बैंक रिकॉर्ड और कर्मचारियों से पूछताछ जारी
एसआईटी एसबीआई और पंजाब नेशनल बैंक के खातों, कैश काउंटिंग रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। साथ ही निगरानी व्यवस्था में हुई कथित लापरवाही की भी पड़ताल की जा रही है।फिलहाल, जांच एजेंसियां पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं। मामले से जुड़े सभी आरोप और दावे जांच के अधीन हैं तथा अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।


