अदालतों में सुनवाई और फैसले में देरी की खबरें हर दिन आती हैं। कई बार सजा सुनाए जाने तक तो आरोपी की एक उम्र बीत चुकी है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बागपत से सामने आया। 27 साल पहले जिस आरोपी की उम्र 38 साल थी, मुकदमा चलते-चलते ही वह शख्स 65 साल का हो गया। गाली-गलौज और जान से धमकी देने के आरोप में इस शख्स को दोषी पाया गया तो जज ने बेहद रोचक सजा सुनाई। 65 साल के बुजुर्ग को अदालत ने सजा दी कि जब तक अदालत की कार्यवाही चले वह दिन भर खड़े रहें। इतना ही नहीं बुजुर्ग पर 1 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

 

अभियोजन अधिकारी अभिराम गौतम ने सोमवार को बताया कि सरूरपुर कलां गांव निवासी धारा सिंह ने 26 जून 1999 को गांव के ही राजेंद्र समेत तीन लोगों के खिलाफ गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए बागपत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। राजेंद्र के खिलाफ मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीन्द्रपाल सिंह की अदालत में विचाराधीन था। लंबे समय तक अदालत में पेश नहीं होने पर उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। बाद में कुर्की नोटिस और कुर्की वारंट भी जारी किए गए।

 

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सरेंडर करके स्वीकार किया गुनाह

शनिवार को राजेंद्र ने अदालत में सरेंडर कर दिया। उसने अदालत को बताया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है और बुढ़ापे और बीमारी के कारण नियमित रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हो सका। आरोपी ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण कम से कम जुर्माने के साथ करने का अनुरोध किया। सुनवाई के बाद अदालत ने राजेंद्र को उस दिन की कार्यवाही समाप्त होते तक अदालत में उपस्थित रहने की सजा सुनाई और कुल एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें गाली-गलौज के जुर्म में 300 रुपये और धमकी देने के जुर्म में 700 रुपये का जुर्माना शामिल है। 

 

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अदालत ने आदेश दिया था कि अगर जुर्माना जमा नहीं किया तो दोषी को 10 दिन जेल में काटने होंगे। अभियोजन अधिकारी के अनुसार, राजेंद्र ने निर्धारित जुर्माना जमा कर दिया और सजा की अवधि पूरी होने यानी दिन भर खड़े रहने के बाद अपने घर लौट गया।