महाराष्ट्र के नासिक जिले में टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (TCS) से जुड़े कथित धर्मांतरण मामले में आरोपी निदा खान ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। निदा खान के वकील ने कोर्ट को बताया था कि निदा खान प्रेगनेंट हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए जमानत दी जानी चाहिए। सरकारी पक्ष ने इस याचिका का विरोध किया और अग्रिम जमानत ना देने की अपील की। कोर्ट ने निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। 

 

नासिक जिला एवं सत्र कोर्ट में सुनवाई के दौरान निदा के वकील ने तर्क दिया था कि वह आठ हफ्ते की प्रेगनेंट है और उस पर लगाए गए आरोपों में अधिकतम सजा तीन साल है। इसलिए उसे गिरफ्तारी से सुरक्षा दी जानी चाहिए। निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला संवेदनशील है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने जमानत की याचिका खारिज की। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। 

प्रेगनेंट महिलाओं की गिरफ्तारी से जुड़े नियम

निदा खान ने प्रेगनेंट होने के चलते गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। ऐसे में सवाल उठता है कि एक प्रेगनेंट महिला को गिरफ्तार किया जा सकता है? अगर गिरफ्तार किया जा सकता है तो उसके क्या नियम हैं? इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है।  

 

भारत में प्रेगनेंट महिलाओं की गिरफ्तारी से जुड़े मुख्य नियम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 में दिए गए हैं। इन नियमों के तहत प्रेगनेंट महिलाओं की गिरफ्तारी पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। नियमों के अनुसार, अगर महिला किसी गंभीर अपराध में शामिल हो और उसकी गिरफ्तारी जरूरी हो, तो पुलिस गिरफ्तार कर सकती है। हालांकि, कानून महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई विशेष सुरक्षा प्रदान करता है। 

रात में गिरफ्तारी नहीं

कुछ विशेष छूट के अलावा महिलाओं की गिरफ्तारी से जुड़े नियम लागू होते हैं। BNSS की धारा 43 के अनुसार, सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी महिला की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है। अगर बेहद जरूरी हो तो महिला पुलिस अधिकारी को लिखित रिपोर्ट देकर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति लेनी होगी। 

विशेष सावधानी बरतने की जरूरत

गिरफ्तारी के दौरान महिला पुलिस अधिकारी का मौजूद होना जरूरी है। प्रेगनेंट महिला के साथ विशेष सावधानी बरती जाना चाहिए। गिरफ्तारी के तुरंत बाद मेडिकल जांच करवाना जरूरी है और गर्भवती महिला को नियमित स्वास्थ्य सुविधा, दवा और सुरक्षित वातावरण देना कानूनन जरूरी है। 

जेल में बच्चे को दे सकती हैं जन्म?

प्रेगनेंट महिला की गिरफ्तारी पर कानून रोक नहीं लगाता लेकिन महिला के स्वास्थय का ध्यान रखना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है। जेल में कई महिलाएं बच्चे को जन्म देती हैं और उनका ख्याल रखने की जिम्मेदारी जेल प्रशासन की होती है। बच्चे को जन्म देने के बाद जब महिला स्वस्थ हो जाती है तो फिर से उसे जेल में लाया जाता है।  हालांकि, कोर्ट समय-समय पर महिलाओं को जेल में रखने के खिलाफ फैसले देते रहे हैं। 

 

एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि संविधान हर गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान गौरवपूर्ण जीवन का अधिकार देता है। कोर्ट उस आने वाले बच्चे के अधिकारों को ध्यान में रख रही है क्योंकि उसे जेल में नहीं रखा जा सकता। जब तक आरोपी की वजह से कोई बहुत बड़ा खतरा न पैदा हो रहा तो अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत दी जा सकती है। BNSS धारा 456 के तहत अगर किसी गर्भवती महिला को फांसी की सजा हो, तो हाई कोर्ट उसे आजीवन कारावास में बदल देगा।