उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी रोकने के लिए सरकार ने प्रीपेड मीटर लगाने के आदेश दिए थे। सितंबर 2025 से प्रीपेड मीटर लगाने का काम शुरू किया गया। पूराने मीटर की जगह पर नए प्रीपेड मीटर लगाए गए। बिजली का नया कनेक्शन कराने वाले उपभोक्ताओं से 6016 रुपये एकमुश्त लिए गए। स्मार्ट मीटर लगने के बाद पूरे प्रदेश में उपभोक्ताओं के बिल गलत आने लगे। बिजली का बिल एक दिन भी जमा नहीं होने पर विभाग उपभोक्ता की बिजली काट देता था।

 

बिजली फिर से चालू कराने के लिए उपभोक्ता को बिजली के बिल के साथ 1500 से 2000 हजार रुपये एडवांस में जमा करने होते थे। इसको लेकर पूरे प्रदेश में हाहाकार मच गया। विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया तो सरकार को बैकफुट पर आ गई। आखिरकार, सरकार ने सभी प्रीपेड मीटरों को जून माह के अंत तक पोस्टपेड करने के आदेश  जारी कर दिए।

प्रीपेड कनेक्शन के नाम पर की गई ज्यादा वसूली

सितंबर 2025 से अप्रैल 2026 तक पांच लाख उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड मीटर लगाए गए। उनसे एक कनेक्शन के नाम पर 6016 रुपये लिए गए। उपभोक्ता परिषद ने इसका विरोध करते हुए पूछा कि प्रीपेड मीटर की कुल कीमत 2800 रुपये है तो फिर उपभोताओं से 3200 रुपये की अतिरक्त वसूली क्यों की गई? सरकार ने पूरे मामले में जांच करवाई तो पता चला कि पांच लाख उपभोक्ताओं से 200 करोड़ से अधिक रुपये वसूल किए गए है। सरकार ने वसूले गए सारे पैसे उपभोक्ताओं को वापिस करने के आदेश दिए हैं।

 

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सरकार ने उपभोक्ताओं के पैसे वापस करने के आदेश दिए हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पैसे उपभोक्ता के बैंक के खाते में आ जाएंगे। बताया गया है कि  बिजली विभाग उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 3200 रुपये का समायोजन करके उसका निराकरण करेगा। मई के अंतिम हफ्ते से यह प्रक्रिया चालू हो जाएगी।

 

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विभाग को एकमुश्त मिल गई 200 करोड़ की रकम

सरकार के इस कदम से प्रीपेड कनेक्शन धारक खुश है लेकिन वह यह कहने से नहीं चूक रहे कि विभाग को तो एक मुश्त 200 करोड़ की रकम मिल गई। विभाग बिल में समायोजन करके धीरे धीरे उपभोक्ताओं की रकम को वापस करेगा, ऐसे में विभाग का तो फायदा ही हुआ है।