हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने स्थानीय ग्रामीण निकाय चुनाव के लिए डेडिकेटेड अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन को मंजूरी दी थी। पंचायत चुनाव के लिए OBC का आरक्षण निर्धारित करने के लिए बनाए जाने वाले इस आयोग के सदस्यों का एलान भी बुधवार को कर दिया गया। हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज राम अवतार सिंह को इस आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके अलावा चार और सदस्यों को इस आयोग में शामिल किया गया है। इसमें दो रिटायर्ड जज और दो रिटायर्ड IAS अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।

 

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, आयोग के चार अन्य सदस्यों में रिटायर्ड अपर जिला जज बृजेश कुमार, रिटायर्ड अपर जिला जज संतोष कुमार विश्वकर्मा, रिटायर्ड IAS अधिकारी अरविंद कुमार चौरसिया और रिटायर्ड IAS अधिकारी एस.पी. सिंह शामिल हैं। अधिसूचना के अनुसार, आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल उनकी नियुक्ति की तारीख से 6 महीने की अवधि के लिए होगा लेकिन अगर जरूरी हुआ तो इसे बढ़ाया भी जा सकता है। बता दें कि इसी आयोग की सिफारिश पर आरक्षण का निर्धारण होगा।

 

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कैसे तय होता है आरक्षण?

 

इस आयोग को ग्रामीण शासी निकायों में आरक्षित सीटों के बंटवारे को निर्धारित करने का दायित्व सौंपा गया है। बता दें कि यूपी में उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के तहत आरक्षण व्यवस्था लागू की जाती है। इन्हीं कानूनों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पंचायती राज (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 लागू हैं। इन दोनों नियमावलियों के जरिए ही यह तय होता है कि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के सदस्य और अध्यक्ष के कितने पद कहां और कैसे आरक्षित किए जाएंगे।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान 'उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' के गठन का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। राज्य में पिछले पंचायत चुनाव साल 2021 में हुए थे और नए चुनाव इस साल के अंत में होने की संभावाना है जबकि ये चुनाव अब तक हो जाने चाहिए थे। दरअसल, 2021 में चुने गए प्रधानों का कार्यकाल मई के आखिर में खत्म हो जाएगा। इसी तरह ब्लॉक और जिला पंचायत के प्रतिनिधियों का कार्यकाल भी समाप्त हो जाएगा और राज्य सरकार की ओर से प्रशासक नियुक्त करने पड़ेंगे।

 

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बता दें कि इस नए आयोग को ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित लोगों के लिए आनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके कार्यक्षेत्र में त्रि-स्तरीय पंचायतों के अंदर विभिन्न पदों के लिए आरक्षण के बंटवारे को निर्धारित करने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करना शामिल है।