उत्तर प्रदेश के संभल जिले में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की शिकायतों के बाद पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरी विशेष अभियान समूह (SOG) टीम को निलंबित कर दिया है। यह फैसला दो अलग-अलग मामलों की जांच में आरोपों की प्रारंभिक पुष्टि के बाद लिया गया। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और इसे विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में सख्त कदम माना जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक को हाल ही में एसओजी टीम से जुड़ी दो गंभीर शिकायतें मिली थीं। पहली घटना 2 फरवरी की रात की बताई गई है, जब एसओजी ने मुरादाबाद के बिलारी निवासी आस मोहम्मद को ई-कचरा ले जाते हुए पकड़ा था। आरोप है कि टीम उसे चौधरी सराय पुलिस चौकी ले गई और कथित रूप से पैसे लेकर छोड़ दिया। साथ ही, जब्त किया गया ई-कचरा भी टीम ने अपने पास रख लिया।
रिश्वत लेकर छोड़ने का आरोप
दूसरे मामले में शिकायत मिली कि एक युवक-युवती का कथित अश्लील वीडियो किसी व्यक्ति ने एसओजी को सौंपा था। इसके आधार पर दो युवकों को हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और कथित तौर पर रिश्वत लेकर उन्हें छोड़ दिया गया। दोनों मामलों की जांच वरिष्ठ स्तर पर कराई गई, जिसमें आरोपों में प्रथम दृष्टया सत्यता पाई गई। इसके बाद एसपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए एसओजी प्रभारी उपनिरीक्षक मोहित कुमार, हेड कांस्टेबल अरशद, कुलवंत सिंह तथा सिपाही अजनबी, विवेक कुमार, बृजेश तोमर, आयुष और हीरेश ठेनुआ को निलंबित कर दिया।
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कबाड़ी वाले से वसूली का आरोप
आरोप है कि चौकी पर पिता-पुत्र को छोड़ने के बदले 30 हजार रुपये की मांग की गई। जफरूद्दीन ने कथित तौर पर रकम देकर खुद और बेटे को छुड़ाया। यह भी आरोप है कि उनके पास मौजूद कबाड़ का सामान पुलिसकर्मियों ने अपने पास रख लिया और बाद में उसे लौटाने के लिए भी पैसे मांगे गए। जफरूद्दीन को आशंका हुई कि वसूली का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। इसके बाद उन्होंने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर दी।
शिकायत के आधार पर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद एसपी ने सख्त कदम उठाते हुए पूरी SOG टीम को निलंबित कर दिया। फिलहाल, बोबिंद्र कुमार को स्वाट टीम का प्रभारी नियुक्त किया गया है। वह पहले थाना रायसत्ती के प्रभारी रह चुके हैं और वर्तमान में पुलिस लाइन में तैनात थे। विभाग ने नई एसओजी टीम के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
