संजय सिंह,पटना। कोच्चि की तर्ज पर पटना में भी वाटर मेट्रो चलाने की योजना है। एक अत्याधुनिक जहाज मरम्मत केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केरल के कोच्चि वाटर मेट्रो की तर्ज पर पटना में वाटर मेट्रो संचालन का डीपीआर राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक्स सर्विस) तैयार कर रहा है।

 

इसमें जेटी निर्माण, टर्मिनल का विकास और जहाजों की खरीद शामिल है। योजना के तहत पटना और आसपास के घाटों से नियमित फेरी सेवा शुरू की जाएगी। अभी 22 हाइब्रिड जहाज लाने का प्रस्ताव है। यह जहाज एक मीटर गहरे पानी में चल सकेंगे। योजना पर करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

 

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इन घाटों के बीच होगा संचालन

पटना में फिलहाल एक इलेक्ट्रिक हाइब्रिड वाटर मेट्रो का ट्रायल चल रहा है। एक और वाटर मेट्रो की सौगात जल्द मिल सकती है। इन दो मेट्रो का परिचालन कंगन घाट, गायघाट, गांधी घाट, दीघा घाट, फरक्का महतो घाट, नारियल घाट, पानापुर, कोंहरा घाट, कलि घाट(सोनपुर) और छेछर घाटों के बीच होगा। यह प्रोजेक्ट पटना वासियों को सस्ता और वैकल्पिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगा।

पटना में बनेगा जहाज रिपेयरिंग सेंटर

पटना में जहाज रिपेयरिंग सेंटर (शिप रिपेयर फैसिलिटी) निर्माण की टेंडर प्रक्रिया इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) ने तेज कर दी है। परिवहन मंत्री ने कहा कि यह बिहार में जलमार्ग के अपार संभावनाओं को साकार करने वाली दूरदर्शी पहल है। उनके मुताबिक पटना में जहाज मरम्मत केंद्र की अनुमानित लागत 243.20 करोड़ रुपये होगी। 

 

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टेंडर के तहत टेक्निकल बिड 10 फरवरी को खोली जाएगी। निर्माण कार्य 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर कोलकाता में ही जहाज मरम्मत की सुविधा है। ऐसे में सभी जहाजों को मरम्मत के लिए कोलकाता भेजना पड़ता है। इससे अधिक लागत के अलावा समय भी बर्बाद होता है।

रिपेयरिंग सेंटर में कौन-कौन सी सुविधा होगी?

  • पोत संचालन और उत्थापन अवसंरचना: स्लिपवे संरचना (ढलानदार कंक्रीट प्लेटफॉर्म), साइड स्लिपवे (छोटे जहाजों के लिए), कंक्रीट प्लेटफॉर्म, जहाज लिफ्ट और स्थानांतरण प्रणाली, 800 टन क्षमता वाला मरीन बोट होइस्ट, हाइड्रोलिक ट्रेलर।
  • मरम्मत कक्ष: प्राथमिक मरम्मत कक्ष, छोटे पोत कक्ष, अतिरिक्त राफ्ट फाउंडेशन स्लैब।
  • उपयोगिता और परिचालन सुविधाएं: विद्युत सबस्टेशन, गैन्ट्री क्रेन, जिब क्रेन, मोबाइल क्रेन, डॉकसाइड क्रेन, जल आपूर्ति-निकासी प्रणाली (ओवरहेड टैंक, पाइपलाइन)।

आईवी एक्ट 2021 के तहत जाहज की जांच अनिवार्य

हर जहाज को अंतर्देशीय पोत अधिनियम 2021 के तहत पंजीकरण और वार्षिक सर्वेक्षण (बीमा, यात्रियों के लिए सुरक्षा उपकरण, जहाज चलाने वाले चालक दल के वैध योग्यता प्रमाण प्रमाण पत्र की जांच) के साथ 4 साल में ड्राईडॉक में जांच अनिवार्य है। ड्राई डॉक में पानी निकालकर जहाज के जलमग्न हिस्से (प्रोपेलर, रडार, संरचना) की जांच, जंग रोकथाम और ईंधन दक्षता सुनिश्चित की जाती है। पटना में यह सुविधा मिलने से कोलकाता जाने की जरूरत नहीं होगी।